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द गुरुकुल की एमडी डा. रजनी थरेजा बोलीं- प्रतिभा की कमी नहीं, महिलाएं अब फाइटर प्लेन उड़ा रहीं

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चंडीगढ़। द गुरुकुल स्कूल, पंचकूला सेक्टर-20 की मैनेजिंग डायरेक्टर डा. रजनी थरेजा की गिनती उन चंद सफल महिलाओं में होती है, जिन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। काम के प्रति निष्ठा और मेहनत के बलबूते बुलंदियों पर चढ़ती चली र्गईं। उनके स्कूल की गिनती आज ट्राइसिटी के टॉप स्कूलों में होती है। गुरुकुल की खासियत है कि उनके टीचर पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को सभ्य नागरिक बनाने पर जोर देते हैं। एक सफल मैनेजर होने के साथ-साथ डा. रजनी बागवानी के क्षेत्र में भी सुपरवुमन हैं। बागवानी में उनका कोई सानी नहीं। ट्राइसिटी में बागवानी संबंधी जितनी भी प्रतियोगिताएं होती हैं, उनमें सबसे ज्यादा अवार्ड उनकी ही झोली में आते हैं।
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर उन्होंने कहा कि किसी भी देश और समाज का विकास महिलाओं की प्रगति के बिना संभव नहीं। यदि महिलाएं पिछड़ती हैं तो पूरा समाज पिछड़ जाएगा। जरूरत है महिलाओं को आगे बढ़ाकर उनकी प्रतिभा का सम्मान करने का। देश में महिलाओं के विकास के लिए अच्छा माहौल बना है। कभी चूल्हा-चौके तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज फाइटर प्लेन उड़ा रही हैं। समाज में अब भी कई ऐसी बुराइयां हैं, जिनसे महिलाओं को रोजाना जूझना पड़ता है, लेकिन हमें इससे उबरकर आगे बढ़ने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल कानून और सरकार कुछ नहीं कर सकते। महिलाओं को अपने स्तर पर अपनी स्थिति सुधारने के लिए कदम बढ़ाने होंगे। महिलाएं समस्या नहीं, समाधान हैं। महिला सशक्त होगी तो देश सशक्त होगा। महिलाओं की समस्या का हल भी महिलाओं के पास ही है। महिलाएं अपने बच्चों में ऐसे संस्कार दें कि वो आगे चलकर महिलाओं का सम्मान करें।
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महिलाओं को निर्णय लेने का अधिकार देना होगा। इसकी शुरुआत भी घर से ही की जानी चाहिए। आज के दौर में ऐसा कोई भी कार्य नहीं है, जिसमें महिलाओं ने सहयोग न किया हो। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सफलता के पीछे उनके पति संजय थरेजा की भूमिका अहम रही है। उन्होंने हमेशा मुझे प्रोत्साहित किया है। आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। चुनौतियों से जूझने और फैसले लेने के लिए तैयार किया है। मेरी निजी राय है कि पुरुषों के नजरिए में भी बदलाव आना चाहिए, तभी इस देश की महिलाएं आगे बढ़ पाएंगी।
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