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कुत्ता आपको काटे तो भुगतना पड़ता है नगर निगम को, चौंक गए न

Wed, 01 Jun 2016 12:46 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़।
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डॉग बाइट के बाद इलाज में नगर निगम का लाखों रुपये का खर्च हो रहा है।
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डॉग बाइट से जान का खतरा होने के साथ नगर निगम और लोगों पर आर्थिक बोझ का भी प्रभाव पड़ता है। एक डॉग बाइट पर नगर निगम के 1728 रुपये खर्च होते हैं तो लोगों के 550 रुपये। चाहे साधारण केस हो या फिर गंभीर। दोनों ही स्थिति में करीब 2300 रुपये का खर्च आता है।
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यदि प्राइवेट इलाज करवाते हैं तो खर्चा सात से आठ गुना बढ़ जाता है। चंडीगढ़ में सेक्टर 19 और सेक्टर 38 एंटी रैबीज क्लीनिक में वैक्सीन और सीरम लगाए जाते हैं। दोनों ही डिस्पेंसरी में चंडीगढ़ के अलावा मोहाली, पटियाला और पंचकूला तक के मरीज आते हैं। अधिकारियों के मुताबिक यदि एक दिन में 20 केस आते हैं, इनमें आधे चंडीगढ़ के होते हैं। 

डॉग बाइट का इलाज करोड़ों पार 
डॉग बाइट के बाद इलाज में नगर निगम का लाखों रुपये का खर्च हो रहा है। नगर निगम की ओर से बताया गया है कि साल 2014 में 72 लाख रुपये की वैक्सीन और साढ़े आठ लाख रुपये के सीरम खरीदे गए। कुल मिलाकर नगर निगम ने डाग बाइट के केसों के इलाज पर करीब 81 लाख रुपये खर्च किए। साल 2015 में डॉग बाइट के केसों में बढ़ोतरी हुई तो इलाज पर खर्च भी बढ़ा। नगर निगम ने वैक्सीन के लिए करीब साढ़े 82 लाख रुपये खर्च किए, जबकि सीरम के लिए 49 लाख यानी साल 2015 में नगर निगम ने इलाज पर कुल सवा करोड़ रुपये खर्च किए।
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डॉग बाइट के केसों में कोई कमी नहीं
नगर निगम भले ही दावा कर रही हो कि नसबंदी से कुत्तों की संख्या में कमी आ रही है, लेकिन डॉग बाइट के केसों में कोई कमी नहीं आई है। साल 2014 में सेक्टर 19 में ड्रॉग बाइट के कुल आठ हजार केस आए थे, जबकि सेक्टर 38 की डिस्पेंसरी में डाग बाइट के 1005 केस दर्ज किए गए। सेक्टर 38 की डिस्पेंसरी साल 2014 में अगस्त से काम करना शुरू हुई थी। इसी तरह से साल 2015 में सेक्टर 19 की डिस्पेंसरी में कुल 6734 केस आए थे, जबकि सेक्टर 38 की डिस्पेंसरी में 3101 केस आए थे। साल 2014 में करीब नौ हजार केस आए थे, जबकि साल 2015 में करीब दस हजार केस। साल 2016 में महीने वार जिस तरह से केस आ रहे हैं, उस हिसाब से दोनों सालों का रिकार्ड टूट जाएगा।

डॉग का करवाते रहे वैक्सीनेशन
रैबीज से बचाव के लिए अपने डॉगी का समय-समय पर वैक्सीनेशन करवाना जरूरी होता है। पंचकूला के डॉग एक्सपर्ट डा. एमआर सिंगला ने बताया कि डॉगी को पहला एंटी रैबीज इंजेक्शन 40-60 दिनों के भीतर लगवाना चाहिए। यानी कि ढाई महीने में पहला, फिर छह महीने में, उसके बाद हर साल एक बार एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाना जरूरी होता है। डा. सिंगला के मुताबिक वैक्सीनेशन के बाद रैबीज नहीं हो सकता है। लाखों में शायद एक केस हो।
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कुत्ते के काटने पर ये बरतें सावधानियां

शहर में कुत्तों का आतंक बरकरार है। डॉग बाइट के केस लगातार बढ़ रहे हैं।
1. कुत्ते के काटने पर जब घाव हो जाए तो उसे 15 मिनट तक पानी की धार से धोएं
2. घाव को कास्टिक सोडा वाले साबुन से भी धोएं। बीटा डीन व डिटॉल से भी धो सकते हैं
3. रैबीज का वायरस लार छोड़ता है। धोने से 80 प्रतिशत तक रैबीज से बचाव हो जाता है
4. घाव पर न तो कोई पट्टी बांधे और न ही कपड़ा। घाव को खुला ही छोड़ देना चाहिए।
5. एक्सपर्ट डॉक्टर के पास जाएं और 24 घंटे के भीतर पहली एंटी रैबीज की डोज लगवा लें।
6. फिर तीसरे, सातवें, 14वें और 28वें दिन एंटी रैबीज का डोज लगवाना होगा।
7. जादू, टोना और घरेलू उपचार के चक्कर में न पड़ें। इससे नुकसान मरीज को होगा।

जब कुत्ते को रैबीज हो जाए तो क्या करें 
डा. सिंगला का कहना है कि रैबीज के दौरान कुत्ता ज्यादा खतरनाक हो जाता है। उस स्थिति में नगर निगम के कर्मचारी और एक्सपर्ट को बुलाना चाहिए। उससे पहले कुत्ते को बांधना होगा, ताकि वह दूसरों में अटैक न कर सके। डॉग एक्सपर्ट उसे इंजेक्शन लगा देते हैं और कुछ देर बाद वह दम तोड़ देता है।
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