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Chandigarh News: संपत्ति मालिक को अनुचित लाभ दिलाने के लिए बदले गए दस्तावेज

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चंडीगढ़। सेक्टर-17 के एस्टेट ऑफिस में संपत्ति से जुड़ी फाइल में छेड़छाड़ के मामले में पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि संपत्ति मालिक को अनुचित लाभ पहुंचाने के मकसद से दस्तावेजों में हेरफेर की गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने ग्रुप-6 कार्यालय में रखी असली फाइल से मूल दस्तावेज हटाकर उनकी जगह दूसरे कागजात रख दिए थे। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह खेल कब से चल रहा था और कितनी फाइलों से इसी तरह छेड़छाड़ की गई। इसके लिए पुराने सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
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सूत्रों ने बताया कि जिस संपत्ति के दस्तावेजों से छेड़छाड़ हुई है, उसके मालिक को भी जल्द जांच में शामिल किया जा सकता है। पूरे मामले की जांच सेक्टर-17 थाना प्रभारी रोहित कुमार खुद कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
तीन दिन का रिमांड मांगा, अदालत ने दिया एक दिन
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद मंगलवार को अदालत में पेश कर तीन दिन के रिमांड की मांग की थी लेकिन अदालत ने एक दिन का पुलिस रिमांड ही मंजूर किया। बुधवार को रिमांड अवधि पूरी होने पर दोनों को फिर अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। सेक्टर-17 थाना पुलिस ने एसडीएम सेंट्रल नवीन की शिकायत पर एस्टेट ऑफिस के क्लर्क ललित मोहन और चपरासी ललित को गिरफ्तार किया था। मामला सेक्टर-42-बी स्थित एक संपत्ति से जुड़ा है।
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शिकायत के अनुसार, संबंधित फाइल की जांच के दौरान पाया गया कि फिजिकल फाइल में मौजूद कुछ पत्राचार पेज स्कैन कॉपी और प्रिंटआउट से मेल नहीं खा रहे थे। दोनों रिकॉर्ड की तुलना करने पर स्पष्ट हुआ कि फाइल में हस्तक्षेप किया गया है और असली दस्तावेजों को अन्य सामग्री से बदल दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी ने प्रारंभिक जांच के आदेश दिए थे जिसकी जिम्मेदारी सहायक एस्टेट अधिकारी नवीन को सौंपी गई।

सीसीटीवी फुटेज में दस्तावेजों से छेड़छाड़ करते दिखे आरोपी
प्रारंभिक जांच के दौरान संबंधित कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए और फाइल रिकॉर्ड की गहन जांच की गई। इसके अलावा 24 सितंबर की रात और 25 सितंबर की सुबह की सीसीटीवी फुटेज खंगाली गई। फुटेज में क्लर्क ललित मोहन और चपरासी ललित को फाइल से दस्तावेज निकालते और बदलते हुए देखा गया। उस समय कार्यालय में दोनों आरोपी ही मौजूद थे। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि दोनों ने आपसी मिलीभगत से सरकारी संपत्ति से जुड़ी फाइल में छेड़छाड़ की।
2021 में भी एस्टेट ऑफिस की फाइलें जलाने का मामला
यह पहला मामला नहीं है जब एस्टेट ऑफिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों। वर्ष 2021 में एस्टेट ऑफिस की फाइलें जलाने का मामला सामने आया था। उस समय तत्कालीन प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के निर्देश पर तत्कालीन डीजीपी संजय बेनीवाल ने मामले की जांच कराई थी और मजिस्टीरियल जांच भी हुई थी। बताया गया था कि आधी रात को एक चौकीदार पुरानी प्रॉपर्टी फाइलें बाहर ले जाकर जला रहा था। एंट्री गेट पर तैनात पुलिसकर्मी ने उसे रोकने की कोशिश की तो वह भागने लगा। बाद में जली हुई फाइलें बरामद की गई थीं। इन लगातार मामलों ने एस्टेट ऑफिस की सुरक्षा और रिकॉर्ड प्रबंधन व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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