फिल्मों को अब सिर्फ मनोरंजन का माध्यम मान लेना सही सोच नहीं है। फिल्मों का दायरा मनोरंजन से कहीं आगे तक बढ़ चुका है। बेहतर फिल्में समाज की सोच में बदलाव का मजबूत आधार बन रही हैं।
फिल्म की कहानी को अगर आम आदमी की जिंदगी से जोड़ा जाए तो उसकी सार्थकता कई गुणा बढ़ सकती है। कुछ ऐसे ही मन के भावों को पेश करती फिल्में वीरवार को चंडीगढ़ में आयोजित नेशनल डॉक्यूमेंटरी फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई।
सेक्टर-26 स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल टीचर्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च (एनआईटीटीटीआर) में सीईसी (कंसोर्टियम ऑफ एजुकेशन कम्युनिकेशन) और यूजीसी के फिल्म फेस्टिवल प्रकृति-2016 का आयोजन किया जा रहा है।
फेस्टिवल में दूसरे दिन 8 फिल्में दिखाई गईं, जिनका थीम ह्यूमन राइट्स और सिनेमा के महत्व को दिखाया गया। फिल्मों के माध्यम से थर्ड जेंडर (किन्नर) जैसे ज्वलंत मुद्दों को पेश किया।
फिल्म में बेटियों की शिक्षा के महत्व पर फोकस किया गया है। फेस्टिवल में सिनेमा,ह्यूमन राइट्स,लॉ से जुड़ी कई जानी मानी हस्तियों ने पैनल चर्चा में हिस्सा लिया।
फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन दूरदर्शन के पूर्व डायरेक्टर जनरल और बिहार में बोर्ड ऑफ रेविन्यू के चेयरमैन त्रिपुरारी शरण विशेष अतिथि थे। फिल्म फेस्टिवल के मुख्य संयोजक और सीईसी डायरेक्टर प्रो.राजबीर सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ में पहली बार आयोजित फेस्टिवल को काफी अच्छा रिस्पांस मिला है।