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PGI में ऑपरेशन टेबल पर मरीज को छोड़ आपस में भिड़े डाक्टर-टेक्नीशियन

Thu, 26 May 2016 10:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : demo pics
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पीजीआई में बढ़ते काम के बोझ का असर अब मारपीट का रूप लेने लगा है। ट्रामा ओटी में मंगलवार रात एक आपरेशन के दौरान ओटी टेक्नीशियन और एनेस्थीसिया के सीनियर रेजिडेंट के बीच झगड़ा हो गया। उसके बाद तैश में आकर सीनियर रेजिडेंट ने ओटी टेक्नीशियन को थप्पड़ मार दिया।
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ओटी टेक्नीशियनों ने इस मामले की शिकायत डिप्टी डायरेक्टर, एचओडी और डायरेक्टर से की है। ओटी टेक्नीशियनों की मांग है कि आरोपी डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई हो। दूसरी तरफ सीनियर रेजिडेंट का कहना है कि उन पर काम का बोझ ज्यादा है। वे ओटी टेक्नीशियन को आपरेशन टेबल पर बुला रहे थे, लेकिन वे उनकी बात को अनसुना कर रहे थे।

सूत्रों का दावा है कि ट्रामा सेंटर में चार आपरेशन टेबल थे, जबकि टेक्नीशियन तीन। एक-एक टेबल पर एक-एक ओटी टेक्नीशियन थे। चौथा टेबल पर भी मरीज आ गया।  डाक्टर ने चौथे टेबल के मरीज के आपरेशन की तैयारी शुरू कर दी, जबकि टेक्नीशियन तीन थे। डाक्टर ने ओटी टेक्नीशियन प्रेम को बुलाया। प्रेम ने कहा कि थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। अभी मरीज टेबल पर है। यहां से खाली होते आ जाऊंगा। प्रेम का आरोप है कि थोड़ा इंतजार करने पर डाक्टर भड़क गए और गाली गलौज पर उतर आए। इसका जब विरोध किया तो उन्होंने थप्पड़ मार दिया।
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सीनियर रेजिडेंट डा. विनोद बिश्नोई का कहना है कि वे मानते हैं कि लैब टेक्नीशियन तीन थे और पर काम का बोझ भी ज्यादा था, लेकिन मरीज को भी देखना जरूरी है। उन्होंने प्रेम को बुलाया, लेकिन वे नहीं आए। काफी इंतजार किया। उसके बाद धक्का-मुक्की हो गई। बाद में मामला शांत भी हो गया है। मैंने खुद उनसे बात भी की है। ओटी टेक्नीशियनों का कहना है कि एक तो ओटी टेक्नीशियनों की संख्या काफी कम है। काम का बोझ काफी ज्यादा है और डाक्टर उनके साथ ऐसा व्यवहार करते हैं।

2012 में भी हुआ था ऐसा मामला
साल 2012 में भी ऐसा मामला हुआ था। उस दौरान सीनियर रेजिडेंट अजय मिश्रा ने आरोप लगाया था कि ओटी टेक्नीशियन गुरप्रीत सेठी ने उन्हें थप्पड़ मारा।  बाद में डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई।
गुरप्रीत को सेठी को सस्पेंड कर दिया। या। दो साल तक जांच चली। जांच में पता चला कि ऐसा कोई मामला हुआ ही नहीं था। हालांकि बाद में गुरप्रीत को वापस बुला लिया गया था। ओटी टेक्नीशियनों का आरोप है कि जब ऐसे मामले में उनके साथी को सस्पेंड कर दिया जाता है तो डाक्टरों को क्यों नहीं।
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