फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यहां 7 रुपए किलो बिकते हैं नोट!

Tue, 22 Apr 2014 07:01 PM IST
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
आपके पर्स में रखा रहने वाला गर्मागरम नोट सामान रखने वाला गत्ता बन जाता है। यह नोट पर्यावरण सुरक्षित रखने में अहम भूमिका अदा कर रहा है। पांच रुपये का हो या फिर हजार का, नोट खराब होते ही पहुंच जाते हैं रिजर्व बैंक आफ इंडिया के पास।
विज्ञापन


एक हजार रुपये की एक गड्डी की कीमत एक लाख होती है पर जब यह खराब हो जाता है तो इसकी कीमत होती है सात रुपये किलो। कुछ समय पहले इसकी वैल्यू तीन रुपये तक थी।
Trending Videos

जलाया नहीं जाता नोटों को

इनको नष्ट करने के लिए अब जलाया नहीं जाता बल्कि उनकी एक खास मशीन से ईंट बनाकर बेच दी जाती है। इसके बाद गत्ते और लिफाफे बनते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग के कारण रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने यह कदम उठाया है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और जम्मू और कश्मीर में अलग-अलग बैंकों के चेस्ट से यहां पर करोड़ों रुपये के नोट आते हैं।

ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण रोकने के लिए कुछ वर्ष पहले नोटों को जलाना बंद किया गया फिर इसे क्रैश करके ईंट बनाने के लिए खास मशीन कुस्टर मंगवाई गई।

2013 में बेची गई नोटों की रद्दी

आरबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि पिछले साल तीन लाख 55 हजार किलो नोटों की रद्दी बेची गई। रिजर्व बैंक आफ इंडिया के एक अधिकारी ने बताया कि प्रतिवर्ष रिजर्व बैंक आफ इंडिया में तीस फीसदी तक नोटों की रद्दी बढ़ जाती है।

आरबीआई सिर्फ नोटों की रद्दी बेंचकर ही अपनी संतुष्टि नहीं करता बल्कि इसका उपयोग और रीसाइकिल के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं उसपर भी नजर रखता है।

बिजनौर जाते हैं ये नोट

नोटों की रद्दी का टेंडर ले चुके एक ठेकेदार ने बताया कि प्रतिमाह तीन से चार ट्रक रद्दी बिजनौर भेजी जाती है। बिजनौर में इस रद्दी को गत्ते में कनवर्ट किया जाता है।
विज्ञापन

इस बार ज्यादा बढ़ेगी रद्दी

रिजर्व बैंक आफ इंडिया के नोटिफिकेशन के अनुसार वर्ष 2005 के पहले इश्यू किए गए नोट को 31 मार्च तक विड्रा किए जाने की वजह से इस बार रद्दी नोटों की संख्या में तीस फीसदी की वृद्धि होने की संभावना है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें