अक्सर देखा जाता है कई लोग अपने बेटों को बहुओं के खिलाफ गलत पाठ पढ़ाते हैं और उनका तिरस्कार करते हैं। वह भूल जाते हैं बहु घर की ताकत होती है। सही मायनों में बहुओं को बेटी की तरह रखना चाहिए।
उनके मान-सम्मान में किसी भी प्रकार की कमी नही छोड़नी चाहिए। कुछ यही दिखाया गया नाटक मामा-भांजे में। जिसका मंचन रविवार को टैगोर थिएटर में किया गया। नाटक में कॉमेडी के साथ संदेश भी दिया गया।
अमृत कश्यप द्वारा लिखित इस नाटक को जेबीएस सोढ़ी ने निर्देशित किया, जिसे डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर्स, चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन और टैगोर थिएटर सोसाइटी ने करवाया। नाटक में परिवार के माध्यम से दिखाया गया कि किस तरह एक पिता अपने बेटों को बहुओं के खिलाफ गलत पाठ पढ़ाता है और कहता है यह पैर की जूती होती हैं।
इसके साथ ही पिता अपनी बहुओं के हर काम में नुक्स भी निकालता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब घर में मामा की एंट्री होती है। पहले मामा देखता है कि घर का माहौल बहुत खराब है। लेकिन मौका पाते ही वह सबको समझाता है और सब कुछ ठीक कर देता है।
वह सबसे छोटे भांजे को अपने साथ ले जाता है और कहता है कि इसको मैं पढ़ाऊंगा-लिखाऊंगा और इसकी शादी करवाउंगा और कभी भी बहू के खिलाफ गलत पाठ नहीं पढ़ाऊंगा। कहानी में नारी सशक्तिकरण का संदेश भी दिया गया।
इन कलाकारों ने लिया भाग
जेबीएस सोढ़ी, प्रोफेसर दिलबाग सिंह, जेपी शर्मा, एमएस नागरा, सरबजीत सिंह, विनोद महाजन और मोनिका।