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फसल कटने के बाद फाने न जलाएं, उनसे ये दो चीजें बनाएं, बड़े काम आएंगी

Fri, 10 Nov 2017 10:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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फसल कटने के बाद फाने न जलाएं
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फसल कटने के बाद खेत में बचे फाने (कृषि अवशेष) किसान किसी काम का न समझकर जला देते हैं, जबकि असल में वह बेहद काम की चीज है। फाने में नैनोसेल्युलोस पाए गए हैं, जो कास्मेटिक इंडस्ट्री केलिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मा एजूकेशन एंड रिसर्च (नाइपर) ने इसकी खोज की है। फाने और चावल के भूसी से मिलने वाले नैनोसेल्युलोस और सिलिका का इस्तेमाल नैपकिन और डाइपर बनाने के अलावा मेडिकल और कास्मेटिक इंडस्ट्री में होता है।
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नाइपर आने वाले दिनों में इस बारे में सरकार को प्रोजेक्ट रिपोर्ट देगी, ताकि किसानों की ओर से फाने को जलाने की बजाय इस्तेमाल में लाया जा सके। कृषि अवशेष जलाए जाने से प्रदूषण होता है और पंजाब, हरियाणा और दिल्ली का वातावरण खराब होता जा रहा है। पंजाब यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल नैनो साईटेक केदौरान नाइपर मोहाली केडायरेक्टर प्रो. ए रघुमराम राव ने बताया कि उनकेसंस्थान में इस रिसर्च पर काम चल रहा था। हाल ही में इस काम को पूरा कर लिया गया है।

चूंकि, पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में खेतों में फाने को लगाई जाने वाली आग से जो धुआं उठता है, उसका दुष्प्रभाव वातावरण पर पड़ता है। प्रो. ए रघुमराम राव के मुताबिक नाइपर में स्टबल (फाना) और राइस स्ट्रा (चावल की भूसी) पर एक रिसर्च की गई। इसमें पाया गया कि स्टबल से नैनोसेल्युलोसका उत्पादन हो सकता है, जोकि मेडिकल इंडस्ट्री में बेहद काम की चीज है। अगर इस रिसर्च को प्रमोट कर जागरूकता लाई जाए तो इनकेजलने से होने वाली समस्या से बचा जा सकता है।
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प्रो. राव केमुताबिक राइस स्ट्रा सिलिका का एक मजबूत उत्पादक है। इसमें से भारी मात्रा में सिलिका को उत्पन्न किया जा सकता है। बड़े स्तर पर इसकी खरीद कर प्रोडक्शन किया जाए तो इसे जलाने की समस्या का निपटान हो सकता है। दरअसल, पंजाब यूनिवर्सिटी में नैनो तकनीक पर दो दिवसीय इंटरनेशनल वर्कशाप शुरू हुई है। इसी दौरान प्रो. राव ने अपने संस्थान की रिसर्च केबारे में बताया।

उन्होंने कहा कि भविष्य नैनो तकनीक का है। कई तरह केऐसे प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है, जिनमें नैनो तकनीक को दवाओं में अधिक से अधिक विकसित करके ज्यादा असरदार बनाया जा सके।

नैनोसेल्युलोस या सिलिका का इस्तेमाल
दरअसल यह ऐसी वस्तु है जो नमी को सोखने में इस्तेमाल की जाती है। मेडिकल या कास्मेटिक इंडस्ट्री में इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है। कुछ ऐसी इंडस्ट्री, जहां इसका इस्तेमाल होता है।
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- नैपकिन बनाने में
- डाइपर केलिए
- जख्म पर करने वाली पट्टी
- कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में
- टेबलेट्स बनाने में
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