पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को डीएलएफ को गुड़गांव में मैगनोलिया हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए दी गई 350 एकड़ जमीन का स्थानांतरण रद्द कर दिया है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण बरकरार रखा गया है और सरकार को हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए नए सिरे से निविदाएं आमंत्रित करने का निर्देश जारी किया है। इस निर्देश के साथ जस्टिस सूर्यकांत एवं जस्टिस अमोल रत्न सिंह की डिवीजन बेंच ने ओम प्रकाश मुकदम बनाम हरियाणा सरकार जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।
हरियाणा सरकार ने वजीराबाद की 278 एकड़ वन भूमि वर्ष 2003 में अधिग्रहीत की थी। इसी प्रकार हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) ने भी 72 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की थी। कई वर्षों तक इस जमीन का उपयोग नहीं किया गया और वर्ष 2009 में हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए निविदाएं मांगी गई थीं।
डीएलएफ को हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए 12000 रुपये प्रति गज के हिसाब से जमीन दी गई थी। इस जमीन पर डीएलएफ ने मैगलोनिया हाउसिंग प्रोजेक्ट के तहत गोल्फ विला बेचने की योजना तैयार कर इसकी कीमत 19 से 22 हजार रुपये प्रति फुट रखी थी।
गुड़गांव में डीएलएफ को जमीन का स्थानांतरण रद्द
इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा गया था कि सरकार ने यह जमीन जनहित के इस्तेमाल के लिए अधिग्रहीत की थी, लेकिन जमीन निजी कंपनी डीएलएफ को दे दी गई और डीएलएफ कम दामों में जमीन हासिल कर काफी ऊंची दरों पर विला बेच रही है।
इसे गलत बताते याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी लिए बगैर वन भूमि को किसी गैर वन प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, लिहाजा भूमि अधिग्रहण रद्द किया जाना चाहिए।
हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए नई निविदाएं देने का निर्देश
मामले में एक पहलू यह भी उठाया गया था कि प्रोजेक्ट के लिए जमीन डीएलएफ को देने के लिए अन्य कंपनियों की निविदाएं ही मंजूर नहीं की गई थीं। इन कंपनियों को दरकिनार कर दिया गया और अकेली दावेदार रह जाने पर जमीन डीएलएफ को दे दी गई।
हरियाणा सरकार ने याचिका पर अपने जवाब में कहा था कि डीएलएफ को जमीन निविदा के जरिए दी गई और यह मामला स्थानांतरण का नहीं बनता। दूसरी ओर, डीएलएफ ने पक्ष रखा था कि हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रोजेक्ट की क्लीयरेंस के लिए पहुंच की है और कमेटी गठित हो चुकी है। इस मामले में अभी फैसला आना बाकी है।
इस मामले में हाईकोर्ट पहले डीएलएफ प्रोजेक्ट पर रोक लगा चुका था और अब अपने फैसले में कहा है कि भूमि अधिग्रहण बरकरार रहेगा और सरकार की ओर से हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए नए सिरे से निविदाएं मांगी जाएं। इसमें डीएलएफ समेत और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां आवेदन कर सकेंगी।