कोरोना काल में महामारी के चलते लोग अपनों से दूर हो रहे थे, वहीं दूसरी ओर वैवाहिक विवाद और घरेलू हिंसा के मामले भी तेजी से बढ़ रहे थे। इसकी पुष्टि चंडीगढ़ जिला अदालत में बड़ी संख्या में आई शिकायतों से की जा सकती है। महामारी के दौर में जिला अदालत में पारिवारिक विवादों और घरेलू हिंसा के लगभग 885 मामले सामने आए हैं। कोरोना काल के बाद कोर्ट खुलने पर सुनवाई शुरू हुई है जिनमें लगभग 15 से 20 प्रतिशत मामलों में निराकरण मिल चुका है। इन मामलों में ज्यादातर में पत्नी ने गुजारा भत्ते का आवेदन किया है लेकिन स्थिति यह है कि भत्ता लेने के लिए उसे महीनों से कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं जिन मामलों में भत्ता मिलना शुरू भी हुआ है उसमें भी कोई न कोई कानूनी बाधा सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार करीब 60 प्रतिशत महिलाओं को गुजारा भत्ते का इंतजार है।
सेक्टर-25 निवासी सुनीता (परिवर्तित नाम) के पति राकेश (परिवर्तित नाम) एक निजी कंपनी में काम करते थे। कोरोना काल में आर्थिक तंगी के चलते दोनों के बीच लड़ाई-झगड़े बढ़ने लगे। मामला फैमिली कोर्ट तक पहुंच गया। सुनीता ने गुजारा भत्ता की मांग की। भत्ता मिलना शुरू हो चुका है लेकिन उसे यह भत्ता नियमित नहीं मिल पा रहा है।
धनास निवासी सरला (परिवर्तित नाम) की शादी कोविड से कुछ महीने पहले हुई थी। पहली लहर के शुरुआती दौर में कुछ महीनों तक स्थिति ठीक रही लेकिन फिर आर्थिक तंगी के कारण दोनों में मनमुटाव शुरू होने लगा। स्थिति तलाक तक पहुंच गई है। मामला गुजारा भत्ता के लिए विचाराधीन है।
युवा पीढ़ी को एक-दूसरे की सोच और भावनाओं के सम्मान की भावना को अपनी आदत में शामिल करना होगा। संयुक्त परिवार का विलय ऐसे मामलों को और हवा देने का काम कर रहा है। ऐसे मामलों में सुलह समझौते के लिए ही मेडिएशन सेंटर का संचालन किया जा रहा है। -नवदीप कौर, संयुक्त सचिव, जिला बार एसोसिएशन चंडीगढ़