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Highcourt:  मोरनी के जंगल की आग में स्थानीय लोगों की भूमिका से नहीं कर सकते इनकार, DFO का हलफनामा

Wed, 12 Jun 2024 02:35 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मोरनी में आग लगने की पहली घटना दो अप्रैल को हुई थी और उसके बाद अलग-अलग स्थानों पर आग के मामले सामने आए थे। विभाग ऐसी आग से निपटने के लिए हर साल तैयारी करता है और इसी क्रम में फायर लाइन बनाना, फायर वाचर को लगाना, आग की किसी भी घटना को पकड़ने और उसे प्रभावी ढंग से बुझाने के लिए टीमें तैयार करना शामिल हैं।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मोरनी के जंगल में आग के मामलों को लेकर डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया है कि इसमें स्थानीय लोगों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे मामले सामने आए हैं कि जहां अपने खेतों को साफ करने के लिए लगाई गई किसानों की आग तेज हवा से जंगलों तक पहुंची और उनके जलने का कारण बनी। आग पर काबू पाने की जानकारी के साथ दाखिल हलफनामा रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी।

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पंचकूला निवासी वैभव वत्स और उदय प्रताप सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए मोरनी के जंगल में 21 मई को लगी आग का मुद्दा उठाया था। याचिका में आग को नियंत्रित करने के लिए तत्काल उचित और आवश्यक कदम उठाने का निर्देश जारी करने की अपील की थी। याचिका में बताया गया था कि आग अभी भी सक्रिय है और यह आस-पास के स्थानों तक फैल रही है। यदि इसे नहीं रोका गया तो यह मनुष्यों व वन्य जीवन सहित पारिस्थितिकी संतुलन पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। 

याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा था। मामले में डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर ने हाईकोर्ट को बताया कि इस आग में स्थानीय निवासियों, पर्यटकों या अतिक्रमण करने वालों की संलिप्तता से इन्कार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनके पास वायु मार्ग से आग बुझाने के लिए अत्याधुनिक उपकरण नहीं हैं लेकिन सीमित संसाधनों से ही आग पर काबू पा लिया गया है। कुछ मामलों में आस-पास के खेतों में सफाई के लिए लगाई गई आग जंगल तक हवा से जा पहुंची थी। लापरवाही के ऐसे मामलों की सूचना पुलिस को दी जा चुकी है।
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उन्होंने बताया कि अधिक गर्मी के कारण नमी में कमी आई है और सूखे चीड़ के वृक्ष आग के प्रति संवेदनशील हो गए हैं। मोरनी में आग लगने की पहली घटना दो अप्रैल को हुई थी और उसके बाद अलग-अलग स्थानों पर आग के मामले सामने आए थे। विभाग ऐसी आग से निपटने के लिए हर साल तैयारी करता है और इसी क्रम में फायर लाइन बनाना, फायर वाचर को लगाना, आग की किसी भी घटना को पकड़ने और उसे प्रभावी ढंग से बुझाने के लिए टीमें तैयार करना शामिल हैं। एक घंटे के भीतर टीमें आग के मामलों की जानकारी उपलब्ध करवा देती हैं और एक गश्ती दल भी है जो प्रत्येक ब्लॉक में संवेदनशील स्थानों पर तैनात टीम की सहायता करता है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि विभाग के पास एक दमकल गाड़ी है जो मोरनी में तैनात है। इसके अलावा, 18 मई को पहली आग की घटना के दिन जिला प्रशासन से दमकल गाड़ियों की मांग की गई थी, जिसे जिला अग्निशमन अधिकारी ने दो-तीन घंटे के भीतर उपलब्ध करा दिया था। अब उक्त दमकल गाड़ियों को मोरनी पहाड़ियों में संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है।

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