चंडीगढ़। बीते मार्च महीने से जिला अदालत का काम ठप है। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला अदालत में मामलों पर सुनवाई नहीं की जा रही थी लेकिन अब पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की बार काउंसिल ने 12 अक्टूबर से भूख हड़ताल करने एलान किया है। उनके साथ अब जिला बार एसोसिएशन के सदस्य भी भूख हड़ताल करने को तैयार हैं। जिला अदालत के वकीलों का कहना है कि 6 महीने से अदालतें बंद होने के कारण वकील, मुंशी और लिपिक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वहीं, पीड़ित भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं।
वकीलों की समस्याओं को समझना चाहिए
हम हर तरीके से बार काउंसिल के साथ हैं। अदालतों को बंद हुए काफी समय हो चुका है। हम उच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें भी वकीलों की समस्याओं को समझकर अदालतें को खोल देना चाहिए। सभी वकील और मुंशी अपना रोजगार खो चुके हैं।
-एनके नंदा, प्रधान, जिला बार एसोसिएशन
ऑनलाइन बहस करने में होती है परेशानी
ऑनलाइन सुनवाई में कई तरह की समस्याएं आती हैं। नेटवर्क और तकनीकी समस्याओं के कारण वकील अच्छी तरह से बहस नहीं कर पाते। वकीलों के कई तर्क रह जाते हैं। 6 महीने से वकीलों ने उच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान किया है, लेकिन अभी अदालतों को खोल देना चाहिए। - नीरज हंस, सचिव, जिला बार एसोसिएशन
अलग-अलग समय पर खोली जाए अदालत
छह महीने से सभी वकील और मुंशी अदालत खुलने का इंतजार कर रहे हैं। जब सब कुछ खोल दिया गया है तो अदालत बंद करने का कोई मतलब नहीं रह जाता। यदि कोरोना का डर है तो अदालत को अलग-अलग समय पर खोला जाना चाहिए। कब तक वकील और मुंशी आर्थिक संकट झेलते रहेंगे। -अशोक कुमार चौहान, पूर्व प्रधान, बार एसोसिएशन