-एसआईटी ने पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन कार्यकारी अभियंता पर लगाए गंभीर आरोप
-मोहाली। आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुमेध सिंह सैनी को बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2021 में दर्ज इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने उन्हें निर्दोष मानते हुए चार्जशीट में कॉलम नंबर-2 में रखा है। वहीं लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के तत्कालीन कार्यकारी अभियंता निमरतदीप सिंह समेत पांच आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई है। मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी को निर्धारित की गई है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित हुई थी एसआईटी
विजिलेंस ब्यूरो ने वर्ष 2021 में इस मामले में पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी और पीडब्ल्यूडी अधिकारी निमरतदीप सिंह को नामजद किया था। इसके बाद सैनी ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। अदालत के निर्देशों के बाद एसएस श्रीवास्तव की अगुवाई में एसआईटी का गठन किया गया। जांच पूरी होने पर एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की, जिसमें सैनी के खिलाफ आरोपों को साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया गया।
35 अचल संपत्तियाें, करोड़ों के लेनदेन का आरोप
चार्जशीट के अनुसार निमरतदीप सिंह, उनके पिता सुरिंदरजीत सिंह जसपाल, अजय कौशल, प्रद्युमन सिंह और अमित सिंगला पर आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं। जांच में सामने आया कि निमरतदीप सिंह और उनके परिवार ने मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला, मुल्लांपुर और कुराली सहित विभिन्न स्थानों पर करीब 35 अचल संपत्तियां अर्जित कीं। परिवार के लगभग 22 बैंक खातों में 4.88 करोड़ रुपये जमा मिले हैं। इसके अलावा 11.18 करोड़ रुपये की एफडी और 2.12 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा खरीदे जाने का भी खुलासा हुआ है।
आय-व्यय में भारी अंतर
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार परिवार की कुल आय 20.57 करोड़ रुपये आंकी गई जबकि खर्च 56.16 करोड़ रुपये से अधिक पाया गया। अन्य आरोपियों पर संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी और महंगी जमीन को सस्ती दर्शाकर लेनदेन करने के आरोप लगाए गए हैं। विजिलेंस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।