सबसे पहले शायर सुखराज सिंह ने कविताओं का पाठ किया। सुखराज सिंह ने कहा कि कविता संग्रह को ढाई महीने में तैयार किया है। इसमें जीवन के रंग हैं। इसमें प्रेम के अलावा गुस्सा, रूठना और मनाना व तन्हाई भी है। सुखराज सिंह सेवानिवृत पुलिस महानिदेशक हैं।
मौके पर प्रसिद्ध आलोचक डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा कि पानी ते लिखे हरफ की कविताएं सिर्फ शब्दों के अर्थ तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि इसमें कायनात पूरक रूप में आती है। यह कविताएं प्रेम का फलसफा पेश करती हैं।
इसके बाद प्रसिद्ध कवि, उपन्यासकार और आलोचक डॉ. मनमोहन ने कहा कि यह प्रौढ़ भावों की कविता है लेकिन अवस्था के भाव एक अलग पहचान बनाते हैं। उन्होंने कविता के शिल्प, रूप और गहराई के बारे में भी बात की।
समारोह के अंत में प्रसिद्ध आलोचक और भारतीय साहित्य अकादमी में पंजाबी बोर्ड संयोजक डॉ. रवेल सिंह ने कहा कि कवि पुलिस विभाग में रहे हैं। इसलिए उन्हें आम कवियों जैसा अभ्यास नहीं है लेकिन कवि ने पारंपरिक कविता का ढांचा तोड़कर नया निर्माण करना होता है। उन्होंने कहा कि कविता में कवि अपने आप को खोज रहा है। प्रसिद्ध लेखक और पंजाब कला परिषद के प्रतिनिधि प्रीतम रुपाल ने आए सभी लोगों का धन्यवाद किया।
मौके पर शायर गुरदेव सिंह, सुरजीत सुमन, भूपिंदर मलिक, गुरदीप सिंह, डॉ. सुरिंदर गिल, शायर भट्टी, सुखविंदर सिद्धू, पाल अजनबी, अवतार पतंग, प्रवेश शर्मा, कृपाल सिंह, मंजीत पाल सिंह, चरणजीत बाठ, हरबंस कौर गिल, सुधा मेहता, परमजीत मान सहित कई लोग उपस्थित रहे।