चंडीगढ़। सेक्टर-15 के रामकृष्ण मिशन आश्रम में तीन दिवसीय वार्षिक समारोह के दूसरे दिन शनिवार को सार्वजनिक बैठक का आयोजन हुआ। इस दौरान श्री मां शारदा देवी के जीवन और शिक्षाओं के विषय पर चर्चा हुई। वह स्वामी विवेकानंद की गुरु मां थीं।
रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी भितिहरानंद ने आए अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने आश्रम की गतिविधियों का वर्णन किया और दर्शकों से अनुरोध किया कि वे नियमित रूप से आश्रम आएं और पढ़ने के कमरे, पुस्तकालय और ध्यान हॉल जैसी सुविधाओं का लाभ उठाएं।
रामकृष्ण मिशन आश्रम दिल्ली के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मां शारदा विनम्रता और आध्यात्मिकता का प्रतीक थीं। श्री रामकृष्ण के निधन के बाद, वह भक्तों के लिए आध्यात्मिक और संगठनात्मक मार्गदर्शक रहीं। वह हमेशा भक्तों की सेवा में प्रसन्न रहती थीं। वह भक्तों को दूसरों में दोष नहीं खोजने के लिए प्रेरित करती थीं, बल्कि अपने ही दोषों को देखने और उन पर कार्य करने के लिए कहती थीं। वह कहती थीं कि पूरी दुनिया हमारी ही है और कोई भी अजनबी नहीं है। इस मौके पर पूर्व आईएएस रजनी सेखरी ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम के समापन के बाद आए भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।