दलित युवक की घुड़चढ़ी को लेकर शनिवार को शुरू हुआ विवाद विधानसभा में भी गूंजा। 29 घंटों के हंगामे के बाद दलित परिवारों में घर वापसी की। मामला करनाल के सग्गा गांव का था। विवाद के चलते सोमवार को गांव छोड़कर करनाल पहुंचे परिवार मंत्रियों और अधिकारियों के आश्वासन के बाद मंगलवार शाम गांव लौट गए। उधर दलितों पर अत्याचार का मामला विधानसभा में भी गूंजा।
विपक्ष ने प्रदेश में दलितों पर अत्याचार बढ़ने को लेकर सरकार को घेरा। इस पर सरकार ने विवाद को सुलझाने का जिम्मा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी और भाजपा विधायक भगवान दास कबीरपंथी को सौंपते हुए उन्हें करनाल भेजा। इस मुद्दे पर विधानसभा में भी जमकर शोर-शराबा हुआ। शून्यकाल में कांग्रेस विधायक कुलदीप शर्मा ने इस मामले पर कहा कि दलित वर्ग के गरीबों को घुड़चढ़ी न निकालने देना भेदभाव है।
विपक्ष के आरोपों पर भाजपा विधायकों व मंत्रियों अनिल विज, कविता जैन, नायब सैनी, सुभाष बराला, ज्ञान चंद गुप्ता ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि दलितों पर उत्पीड़न तो कांग्रेस शासन में भी हुए हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दलित हैं, उनके साथ दिल्ली में हुई घटना सब जानते हैं। कांग्रेस की ओर से विधायक गीता भुक्कल, उदयभान, शकुंतला खटक ने कुलदीप शर्मा का साथ देते हुए सरकार पर दलितों के प्रति गंभीर न होने का आरोप लगाया।
कुलदीप ने कहा कि गरीब गांव छोड़ने को क्यों मजबूर हो रहे हैं, इस पर सीएम जवाब दें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी अनुसूचित जाति के सदस्यों से संबंधित कोई घटना होती है तो उस पर राजनीति शुरू हो जाती है। यहां तक कि दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लोग भी उसमें शामिल हो जाते हैं और दूसरों को भी उकसाया जाता है।
इससे पूर्व दोनों समुदाय मुद्दे को सुलझाने पर सहमत हो गए थे, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे, जो पुलिस के दर्ज मामलों के अनुसार कार्रवाई करवाना चाहते थे। इसके बाद दोनों पक्ष में फिर विवाद हो गया और सौ से डेढ़ सौ परिवार गांव से पलायन कर करनाल पहुंच गए।