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हरियाणा विसः दादुपुर नलवी नहर पर सियासत- जब सुधर रहा था भूजल, तो पीछे क्यों हटी सरकार

Wed, 04 Mar 2020 10:43 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़
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विधानसभा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल - फोटो : अमर उजाला
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शिवालिक क्षेत्रों के कुछ जिलों में भूजल को बढ़ाने के उद्देश्य शुरू की गई दादुपुर नलवी नहर विधानसभा में फिर से सियासत का केंद्र बनी। 2018 में जिस प्रोजेक्ट को डिनोटिफाई कर हरियाणा सरकार पीछे हट चुकी है।
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उस पर सिंचाई विभाग की एक आरटीआई के बूते विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की। ये आरटीआई इस प्रोजेक्ट को डिनोटिफाई करने से ठीक पहले की है। उधर,  इनेलो व कांग्रेस के विधायक दादुपुर नलवी नहर के मुद्दे पर सरकार को लगातार निशाने पर लिए हुए हैं। मगर सरकार फैसले पर अडिग है।

आरटीआई में एक्सईएन ने माना कई गांवों का जलस्तर सुधरा

कश्मीर सिंह नाम के एक व्यक्ति ने सिंचाई विभाग के अधीनस्थ जल सेवाएं मंडल दादुपुर विंग से पूछा था कि डार्क जोन की क्या परिभाषा होती है और उनके जिला यमुनानगर के जिन हिस्सों से दादुपुर नलवी नहर गुजर रही है और जहां तक अभी बन चुकी है, वहां नहर से सटे गांवों में भूजल की क्या स्थिति है।

इस पर जल सेवाएं मंडल दादुपुर के कार्यकारी अभियंता ने कश्मीर सिंह को आरटीआई का जवाब देते हुए बताया कि जहां भूजल काफी नीचे चला जाता है और पानी की बहुत ही कम मात्रा शेष रह गई हो उस क्षेत्र को डार्क जोन कहा जाता है। दूसरे जवाब में एक्सईएन ने बताया कि दादुपुर नलवी नहर के चलने से इस कार्यालय द्वारा बनाए गए भाग किमी 11-587 से 19-155 किमी तक गांव गुलाब नगर, भटौली, हरिपुर जट्टान, कैल, खेडा, सुडैल इत्यादि गांवों के भूजल में सुधार हुआ है और यहां भूजल नीचे गिरने से बचा है।

किसान ही इसके हक में नहीं थे, इसलिए बंद की परियोजना
सरकार के संसदीय कार्यमंत्री कंवरपाल गुर्जर ने कहा कि सरकार इस परियोजना से पीछे नहीं हटी है। बल्कि किसान ही  इस नहर के हक में नहीं थे।  इसके लिए कई किसान संबंधित जिला उपायुक्त को भी ज्ञापन सौंप चुके थे। किसानों का कहना था कि इस नहर से ज्यादा क्षेत्र को प्रभाव होने वाला नहीं है। जबकि नहर में मोड़ भी बहुत ज्यादा है। जबकि ये तकनीकी हिसाब से भी ठीक नहीं है। मंत्री के अनुसार किसानों की मांग के बाद ही सरकार ने इसे डिनोटिफाई किया है, क्योंकि इस एरिया में सरकार के पास वॉटर रिर्चाजिंग को लेकर अन्य कार्ययोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
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किसानों को भूमि अधिग्रहण की एन्हांसमेंट न देनी पड़े, इसलिए बंद की परियोजना

रादौर से विधायक बिशन लाल सैनी ने सदन में हरियाणा सरकर को इसी मसले पर घेरा। उन्होंने कहा कि आरटीआई से साबित हो रहा है कि अधूरी नहर के बावजूद इससे सटे गांवों का न केवल भूजल नीचे गिरने से बचा है, बल्कि भूजल में सुधार भी हुआ है। यदि ये नहर पूरी बन जाती, तो निसंदेह इस डार्क जोन एरिया का जलस्तर बेहतर होता, जिसका लाभ किसानों को सिंचाई के रूप में भी मिलता।

विधायक सैनी ने कहा कि दरअसल, इस संदर्भ में किसानों की जो जमीन अधिगृहित की गई थी, उनमें से कई किसान प्रति एकड़ मुआवजा अधिक दिया जाए, इस मांग को लेकर हाईकोर्ट गए थे। ग्रामीणों की अपील पर कोर्ट ने मुआवजे की दर 2887 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दी थी। इसके बाद मुआवजे राशि बढ़ती चली गई। ये एन्हांसमेंट की राशि अब हरियाणा सरकार को किसानों को देनी थी। मगर ऐसा करने की बजाए हरियाणा सरकार ने इस प्रोजेक्ट को ही डिनोटिफाई कर दिया।

जिससे इस पर खर्च हो चुके करोड़ों रुपये भी बर्बाद हो गए है। प्रोजेक्ट डिनोटिफाई करने के बाद किसानों की जमीनें भी वापस कर दी गई। मगर हैरानी की बात यह कि जो जमीनें किसानों को वापस की गई हैं, उनमें इतने ज्यादा गड्ढे हैं कि न तो किसान इन पर खेती कर सकते हैं और न ही इन गहरे गड्ढों की भरत करवाना अधिकतर किसानों के लिए आसान काम है।

 
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