अबकी बार लोकसभा चुनाव के दौरान टैक्सी का धंधा मंदा है। वोटरों को रिझाने के लिए चल रहे हैं एनाउंसमेंट करने के लिए थ्री व्हीलर।
रैलियों के लिए टैक्सी की जरूरत अबकी कम हो चुकी है। पिछले चुनाव में नेताजी के काफिले में शामिल होने वाली लंबी चौड़ी गाड़ियों की कतार गायब हो चुकी है।
पिछले बार तक यहां ढाई हजार कारों का काफिला होता था। अबकी बार काफिला सिमटकर पंद्रह सौ कारों तक ही रह गया है।
चंडीगढ़ में ढाई सौ टैक्सी मालिक हैं। पहले चुनाव आते ही प्रतिदिन के लिए दस टैक्सी बुक हो जाती थीं वहीं अब यह संख्या सिमटकर चार तक रह गई है।
शिवम ट्रैवल्स के बलजिंदर सिंह ने कहा कि चुनाव के दौरान टैक्सियां इलेक्शन ड्यूटी पर जाती हैं और प्रत्याशियों के प्रचार के लिए ली जाती हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान अब तक सिर्फ दो एसाइनमेंट ही मिले।
इसमें हरेक में दस टैक्सियां डिमांड की गई थीं। वहीं रायल सर्विस के आशीष ने कहा कि चुनाव की कंपेनिंग के दौरान टैक्सी के रेट अच्छे मिलते हैं। उनको भी बिजनेस कम ही मिला।
वाहन का किराया
टवेरा 1300 रुपये
जाइलो 1500 रुपये
क्वालिस 1400 रुपये
इनोवा 1200 रुपये
(ईंधन के अतिरिक्त)
ढोल वालों की बल्ले-बल्ले
सिटी में चुनाव प्रचार के दौरान ढोल वालों की बल्ले-बल्ले हो गई है। यहां ढाई सौ ढोली हैं। यह सभी व्यस्त हैं। कोई कालोनियों में प्रचार करने में लगा है तो कोई प्रत्याशी के संग कंपेनिंग कर रहा है। चंडीगढ़ के डड्डू माजरा निवासी ढोली जोगिंदर ने कहा कि पंजाब में भी यहां से ही ढोली बुलाए जा रहे हैं वहीं जानी ने कहा कि चुनाव के दौरान अच्छे रेट्स मिल रहे हैं। ढोली के रेट्स दो से तीन हजार तक पहुंच चुके हैं।