तीन दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में अधिकारियों को दिए गुर
चंडीगढ़। जल शक्ति मंत्रालय के पास जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित जल स्त्रोतों व संसाधनों का कोई डाटा नहीं है। ऐसे में मंत्रालय ने देशभर के पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित जल स्त्रोतों व संसाधनों की डिजिटल गणना कराने का फैसला लिया है। चंडीगढ़ में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षित किया गया और जल स्त्रोतों की गणना की रूपरेखा तैयार की गई।
जल संसाधन विभाग, नदी विकास और गंगा संरक्षण, लघु सिंचाई प्रकोष्ठ की उप महानिदेशक प्रियंका कुलश्रेष्ठ के मुताबिक जल संसाधनों की डिजिटल गणना के साथ-साथ जल संसाधनों व निकायों की वास्तविक स्थिति के साथ जल दोहन और भूजल स्तर का भी आकलन होगा। तीन दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ के मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया गया।
डिजिटल गणना से केंद्र व राज्य सरकार के पास जल संसाधनों का पूरा डाटा होगा, जिससे आगामी जल संबंधित योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में मदद मिलेगी। खासकर, भू-जल दोहन से डार्क जोन में पहुंच चुके क्षेत्रों के लिए नई योजनाओं में मददगार साबित होगी। भू-अभिलेख विभाग के डीआरओ तरुण ने बताया कि यह मास्टर ट्रेनर जिला व ब्लाक स्तर पर डिटिजल गणना को लेकर प्रशिक्षण देंगे।