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पंजाब: कैबिनेट के लिए आसान नहीं राणा गुरजीत की राह

Mon, 22 Jul 2019 03:57 AM IST
Abhishek Singh अखिल तलवार, चंडीगढ़
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Rana Gurjeet Singh - फोटो : File Photo
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नवजोत सिद्धू के कैबिनेट से इस्तीफे का बाद खाली हुई सीट के लिए दोआबा के दिग्गज राणा गुरजीत को सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है। लेकिन राणा के लिए कैबिनेट की राह आसान नहीं है। नवजोत सिद्धू की कांग्रेस में एंट्री नई दिल्ली के जरिए हुई थी।

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सिद्धू हमेशा यह जताते रहे हैं कि वह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के करीबी हैं। लेकिन सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद सिद्धू को आखिर कैबिनेट से जाना ही पड़ा। जाहिर है कि कैप्टन पर हाईकमान का दबाव जरूर था कि वह सिद्धू को सम्मानजनक तरीके से एडजस्ट करें। लेकिन उन्होंने हाईकमान की बात मानने से साफ इंकार कर दिया। 

सिद्धू को बिजली विभाग ज्वाइन करने का ही विकल्प दिया और अंत में सिद्धू को इस्तीफा देना पड़ा। राणा गुरजीत को सीएम का करीबी माना जाता है। रेत खदानों की नीलामी में गंभीर आरोप लगने के बाद भी सीएम ने राणा का हमेशा बचाव किया। लेकिन पार्टी हाईकमान लोकसभा चुनाव में पंजाब मॉडल को प्रोजेक्ट करना चाहता था, जिसमें दागी मंत्री होने से गलत संदेश जा सकता था। इसलिए राहुल और प्रियंका के दबाव में सीएम को राणा गुरजीत का इस्तीफा लेना पड़ा।
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अब अगर वह राणा को दोबारा बिजली मंत्री बनाते हैं तो सिद्धू के बाद हाईकमान के साथ एक और फ्रंट खुल जाएगा। जो सीएम कभी नहीं चाहेंगे। वहीं, इससे सिद्धू को तो बोलने का मौका मिलेगा ही, सरकार पर विपक्ष के हमले भी बढ़ जाएंगे। ये बातें राणा के समीकरण बिगाड़ सकती हैं।

दोआबा के दलित की लग सकती है लॉटरी

कांग्रेसी हलकों में चर्चा है कि अगर राणा गुरजीत की कैबिनेट में वापसी न हुई तो दोआबा के किसी दलित या ओबीसी की लॉटरी लग सकती है। लोकसभा चुनाव में दोआबा का सारा दलित वोट बैंक कांग्रेस से छिटक कर बसपा को चला गया। जो पार्टी के लिए चिंता की बात है।

सीएम के मिशन 2022 के लिए दोआबा के दलित वोट बैंक की वापसी बहुत जरूरी है। इसलिए रविदास बिरादरी से सुशील रिंकू को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। सीएम के करीबी ओबीसी वर्ग से संगत सिंह गिलजियां का नाम भी चल रहा है। चौधरी जगजीत के निधन के बाद पार्टी दोआबा में दलित लीडरशिप डेवलप करना चाहती है।

वहीं, सूत्रों के मुताबिक सीएम ने एक अफसर से वाल्मीकि, मजहबी सिख वर्ग के बारे में फीडबैक लिया है। इस वर्ग की लोकसभा में भी अनदेखी की गई। मिशन 2022 के लिए एक कैबिनेट सीट इस वर्ग को मिलने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। उस स्थिति में सुखविंदर डैनी या डॉ. राजकुमार वेरका को मौका मिल सकता है।

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