सुखदेव ढींढसा और रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा
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पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) के नेता एकमत नहीं हैं। भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संगठन अध्यक्ष सुखदेव ढींढसा की मुलाकात पर पार्टी नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने इस मुलाकात पर नाराजगी जताई है। ढींढसा ने पार्टी में बढ़ती नाराजगी को देखते हुए 21 दिसंबर को बैठक बुलाई है, जिसमें गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला किया जाएगा।
शिअद संयुक्त के कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर नाराजगी जोर पकड़ रही है कि भाजपा के साथ ढींढसा गठबंधन को लेकर तैयार हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं का तर्क है कि केंद्र में बैठी भाजपा सरकार ने भले ही कृषि कानून वापस ले लिए हों लेकिन किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों को लेकर नाराजगी अभी बाकी हैं। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर भी पंजाब में लोग नाखुश हैं। ऐसे में भाजपा और कैप्टन अमरिंदर सिंह से गठजोड़ करने पर पार्टी को चुनाव में नुकसान हो सकता है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता रणजीत ब्रह्मपुरा इस गठबंधन को लेकर खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि पार्टी कार्यकर्ता इस गठबंधन को लेकर पहले भी नाराजगी जता चुके हैं, इसके बाद भी ढींढसा अमित शाह से मिल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी तक दे दी है कि अगर शिअद संयुक्त भाजपा से गठबंधन करता है तो वह पार्टी से इस्तीफा दे देंगे। उनकी इस चेतावनी को देखते हुए पार्टी ने 21 दिसंबर को एक बैठक बुलाई है, जिसमें भाजपा और कैप्टन के साथ गठबंधन को लेकर चर्चा की जाएगी और अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
ब्रह्मपुरा की शिअद में जाने की अटकलें
नाराजगी के बाद रणजीत ब्रह्मपुरा की शिअद बादल में जाने की अटकलें शुरू हो गई हैं। इसके पीछे की बड़ी वजह यह भी बताई जा रही है कि अकाली दल ने अभी खडूर साहिब सीट खाली रखी है। इसी सीट से शिअद संयुक्त के नेता रणजीत ब्रह्मपुरा विधायक भी रह चुके हैं। हालांकि ब्रह्मपुरा का इस मामले में कहना है कि वह अभी इस पर कुछ भी बोलना नहीं चाहते हैं, आगे क्या होगा वह भविष्य के गर्त में है।