चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिंथेटिक ड्रग्स मामले में फंसाने के आरोप लगाते हुए शहर के केमिस्ट की याचिका पर चंडीगढ़ पुलिस के महानिदेशक को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि डीजीपी याचिकाकर्ता की शिकायतों और पुलिस की ओर से जमानत कार्यवाही के दौरान पेश किए गए स्टेटस रिपोर्ट की व्यापक समीक्षा करें।
याचिकाकर्ता केमिस्ट करण शारदा व एक अन्य आरोपी दुर्गेश को मार्च 2020 में इंडस्ट्रियल एरिया थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का दावा था कि सेक्टर-29 स्थित साईं बाबा मंदिर के पास शारदा की गाड़ी से प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुईं। हालांकि, शारदा का आरोप है कि उन्हें जीरकपुर-अंबाला हाईवे से सादे कपड़ों में कुछ लोगों ने उठाया और सेक्टर-29 लाकर जबरन दुर्गेश को बुलाने को कहा गया जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार दिखाया गया। उनका कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और काल रिकॉर्ड से सच्चाई सामने आ सकती है।
सितंबर 2020 में भी हाईकोर्ट ने विरोधाभासी परिस्थितियों पर डीजीपी को जांच करने का निर्देश दिया था। इसके बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन हुआ और शारदा को तीन महीने की हिरासत के बाद जमानत मिली। 2022 में एसआईटी ने कैंसलेशन रिपोर्ट दाखिल कर दी जिसके बाद शारदा को डिस्चार्ज कर दिया गया। शारदा का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने दोषी पुलिसकर्मियों को बचाया था। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई व इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की। शारदा ने तर्क दिया कि 2020 में मांगा गया हलफनामा अब तक दाखिल नहीं हुआ। यूटी प्रशासन की ओर से कहा गया कि कोविड-19 महामारी और बाद में केस बंद हो जाने के चलते यह चूक हुई, जिसका कोई दुर्भावना से संबंध नहीं था। कोर्ट ने इस दलील पर नाराजगी जताते हुए दोबारा डीजीपी को आदेश दिया कि वे सभी तथ्यों और जांच रिपोर्ट का मिलान कर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें।