पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की जनरल हाउस बैठक सोमवार को दोपहर एक बजे मुख्य बार रूम में हुई। इसमें कहा गया कि हाईकोर्ट का स्थानांतरण स्वीकार नहीं है। बैठक में प्रस्ताव पास किया गया कि हाईकोर्ट को सारंगपुर या किसी भी अन्य वैकल्पिक स्थल पर किसी भी परिस्थिति में स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। बार एसोसिएशन हर संभव प्रयास करेगी कि हाईकोर्ट के मौजूदा परिसर से सटे वन क्षेत्र को डि-रिजर्व कराया जाए ताकि यहीं पर हाईकोर्ट का विस्तार हो सके।
हाईकोर्ट में स्थान की कमी के चलते इमारत पर बढ़ते बोझ को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की इमारत को शिफ्ट करने या किसी अन्य विकल्प पर सहमति नहीं बन रही थी। चीफ जस्टिस ने स्पष्ट कर दिया था कि इमारत को शिफ्ट करने या अतिरिक्त स्थान पर कोर्ट तभी फैसला लेगा जब वकीलों के बीच सहमति बनेगी।
कोर्ट के आदेश पर सोमवार को जनरल हाउस का आयोजन किया गया। लंबी चर्चा के बाद जनरल हाउस ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को सारंगपुर या किसी भी अन्य वैकल्पिक स्थल पर किसी भी परिस्थिति में स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। दूसरे एजेंडा पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि बार एसोसिएशन हर संभव प्रयास करेगी कि हाईकोर्ट के मौजूदा परिसर से सटे वन क्षेत्र को डि-रिजर्व कराया जाए ताकि यहीं पर हाईकोर्ट का विस्तार हो सके।
बार एसोसिएशन का मानना है कि हाईकोर्ट का मौजूदा स्थान पर बने रहना ही विधिक बिरादरी, न्यायिक प्रक्रिया और आम जनता के हित में है। बताया गया कि इस प्रस्ताव की प्रतियां माननीय मुख्य न्यायाधीश और सभी साथी न्यायाधीशों, भारत सरकार के विधि मंत्री, पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों तथा यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक को उनके संज्ञान और आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी जाएंगी। इस तरह बार एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि हाईकोर्ट का विस्तार केवल वर्तमान स्थान पर ही होना चाहिए और किसी भी प्रकार का स्थानांतरण स्वीकार्य नहीं है।