अमृतसर में सूर्य देव को अर्घ्य देते श्रद्धालु।
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छठ पूजा को लेकर हमेशा की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं में भारी उत्साह दिखा। बुधवार की दोपहर से ही अमृतसर श्री दुर्ग्याणा मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई। सूर्य ढलने के समय हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सरोवर में खड़े होकर सूर्य देव की पूजा अर्चना की। उन्होंने अपने परिवार के अच्छे स्वस्थ और बच्चों की सफलता की कामना भी की।
कौशल्या देवी ने बताया कि वे पिछले लंबे समय से यह व्रत करती आ रहीं हैं। वे अपने परिवार और बच्चों की लंबी उम्र की कामना के साथ उनके बेहतर भविष्य और सफल जिंदगी के लिए प्रार्थना करती हुई सूर्य देव के समक्ष नमन करती हैं। इस व्रत में वे सूर्यास्त के समय सूर्य की पूजा करेंगी।
गुरुवार की सुबह उगते सूर्य की पूजा-अर्चना करेंगी। श्री दुर्ग्याणा मंदिर में छठ पूजा के लिए पहुंची कामिनी देवी ने बताया कि यह पर्व हमारा सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। इसके लिए कई दिन पहले से ही घरों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। छठ पूजा वाले दिन शाम और इसके अगले दिन सुबह सूर्य देव को पूजा जाता है।
श्री कीरतपुर साहिब में दिया डूबते सूरज को अर्घ्य
श्री कीरतपुर साहिब के निकट सतलुज नदी पर बने घाट पर छठ पूजा का त्योहार लोगों ने श्रद्धापूर्वक और हर्षोल्लास से मनाया। सतलुज नदी के घाट को दुल्हन की तरह सजाया गया था। व्रतियों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान बैंडबाज के साथ लोग छठी मैया की पूजा करने घाट पर पहुंचे। नरेश कुमार, सीमा देवी, राम अवतार ,हरि कृष्ण ,माणक कुमार, अनिल कुमार संतोषी देवी ने बताया कि नहाय खाय से लोक आस्था का महापर्व शुरू हुआ। दूसरे दिन डूबते सूरज को अर्घ्य दिया है। गुरुवार की सुबह विधि विधान से छठी मैया की पूजा की जाएगी और अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।