हलवा और पूरी-छोले तो नहीं मिले। लेकिन तेज भूख में चार हजार क्विंटल दूध से बनी खीर सेकेंडों में चट हो गई। ड्राईफ्रूट मिक्स खीर बच्चों को स्वादिष्ट जरूर लगी।
लेकिन कई अभिभावकों ने पद्मा एकादशी के दिन चावल की खीर परोसे जाने पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि खुद हिंदू धार्मिक परंपराओं को स्वीकार करने वाले लोग एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित मानते हैं और स्वयं इस्कॉन संत अपने धार्मिक संदेश में इस बात का प्रचार भी करते हैं।
लेकिन इस्कॉन फूड रिलीफ फाउंडेशन ने अपने ही के संतों के संदेश को नजरअंदाज कर लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।
बता दें कि इस्कॉन की ओर से शिक्षक दिवस पर खीर परोसे जाने का कड़ा विरोध हो रहा था। शिक्षा विभाग के अधिकारी व शिक्षक भी सरकार के आदेशानुसार पूरी-छोले और हलवा ही परोसने की हिमायत कर रहे थे।
अधिकारियों का कहना है कि कुरुक्षेत्र, गुड़गांव और फरीदाबाद के सरकारी स्कूलों के 3 लाख 20 हजार विद्यार्थियों को मिड-डे मील सप्लाई करने वाली संस्था इस्कॉन फाउंडेशन ने सरकार के मेन्यू के लिहाज से पांच सितंबर को भोजन परोसने में असमर्थता जताते हुए हाथ खड़े कर दिए थे।
एकादशी के दिन चावल का भोग वर्जित
श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं तीर्थ पुरोहित पवन शर्मा पौणी के अनुसार पद्मा एकादशी का पुराणों में बहुत महत्व है।
इस दिन भगवान विष्णु अपने चार माह के शयन के दौरान करवट बदलते हैं। एकादशी के दिन भगवान विष्णु को चावल का भोग वर्जित है।
लेकिन इस दिन इस्कॉन ने विद्यार्थियों को खीर वितरित की है जो सनातन धर्म के अनुसार गलत है। पौणी ने कहा कि वे इसकी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर खीर बांटनी ही थी तो साबुदाना का प्रयोग किया जा सकता था या फिर सामक के चावल खिलाए जा सकते थे।
सरकारी योजना के तहत होता है भोजन तैयार : साक्षी
इस्कॉन जिलाध्यक्ष साक्षी गोपालदास ने कहा कि एकादशी के दिन चावल व अन्न का प्रयोग सर्वथा वर्जित होता है। इस्कॉन रिलीफ फूड सरकारी योजना के तहत ही भोजन तैयार करके सप्लाई करता है।
स्वादिष्ट खीर के लिए मेहनत और माथापच्ची
2500 किलो चावल, 75 किलो काजू व 90 किलो बादाम
हरियाणा के तीन जिलों में मिड-डे मील सप्लाई कर रही इस्कॉन फूड रिलीफ फाउंडेशन के डिप्टी डायरेक्टर बलवान सिंह के मुताबिक स्कूल के बच्चों ने खीर को पसंद किया।
इस खीर में 4000 क्विंटल दूध, 25 क्विंटल चावल, 75 किलोग्राम काजू, 150 किलोग्राम किशमिश, 25 किलो चिरोंजी और 15 किलो छोटी इलायची, 31 किलो चीनी ने मीठा और स्वादिष्ट बनाया गया था।
5 घंटे में बनी खीर, 33 गाड़ियों से पहुंची 570 स्कूलों में
इस्कान ने शुक्रवार को ये खीर 570 सरकारी स्कूलों में पहुंचाई। हालांकि इस्कॉन रोजाना सिर्फ पहली से आठवीं तक ही भोजन की सप्लाई देती है।
लेकिन शिक्षक दिवस पर 12वीं कक्षा तक खीर की सप्लाई दी गई। इसमें 33 गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया और सुबह चार बजे से नौ बजे के बीच खीर को अत्याधुनिक उपकरणों में पांच घंटे की अवधि के दौरान तैयार किया गया। इसके बाद 1700 ड्रम में भरकर इस खीर को स्कूलों में भिजवाने की व्यवस्था हुई।
खीर नहीं, मास्टर जी को मिला सिर्फ एक केला
जिनके नाम पर शिक्षक दिवस मनाया जा रहा था। उन 570 सरकारी स्कूलों के गुरुजनों को हलवा, पूरी और छोले तो दूर खीर भी नहीं मिली, इन्हें इस्कॉन की ओर से सिर्फ एक केला खाने को दिया गया।
बताया ये गया है कि ये केला भी सिर्फ कुरुक्षेत्र के शिक्षकों की ही नसीब। हुआ जबकि इस्कॉन के डिप्टी डायरेक्टर बलवान सिंह का कहना है कि उन्हें प्रशासन ने देरी से बताया।
वरना वे शिक्षकों के लिए और अच्छे फ्रूट का इंतजाम कर सकते थे। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र से उन्हें केवल 25 क्विंटल केला ही उपलब्ध हो सका,। जिसकी वजह से उन्होंने शिक्षकों को 1-1 केले का वितरण किया।