पीजीआई में सात दिन से हॉस्पिटल अटेंडेंट, किचन स्टाफ, सफाई कर्मी व ऑफिस बियरर की हड़ताल से व्यवस्था चरमरा गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए बुधवार को हड़ताल पर रोक लगा दी थी और अनुबंधकर्मियों को तुरंत काम पर लौटने का आदेश दिया। साथ ही यूटी प्रशासन व पीजीआई प्रबंधन को आदेश दिया कि जो कर्मचारी काम पर न लाैटें, उन पर कार्रवाई की जाए।
पीजीआई चंडीगढ़ ने याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया कि पीजीआई अटेंडेंट कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन ने 16 सितंबर को उन्हें नोटिस दिया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के फरवरी 2020 में जारी आदेश के अनुसार अनुबंधकर्मियों को नियमित कर्मियों के समान वेतन दिया जाए। साथ ही इस वेतन का एरियर जारी किया जाए और इसमें से कोई कटौती न की जाए।
नोटिस में कहा गया था कि यदि एरियर के साथ यह राशि 10 अक्तूबर तक जारी नहीं की गई तो हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। हड़ताल शुरू होने के बाद पीजीआई की अन्य यूनियनों ने भी उन्हें अपना समर्थन दे दिया और काम छोड़ दिया। पीजीआई की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट ने बीते 9 अगस्त को पीजीआई की कर्मचारी यूनियनों के हड़ताल के आदेश पर रोक लगाई थी, बावजूद इसके यह हड़ताल की जा रही है।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि अस्पताल अनिवार्य क्षेत्र है और उसके कर्मचारी सेवा विवाद के चलते काम से गैरमौजूद नहीं रह सकते। इससे पीजीआई की स्वच्छता और सफाई व्यवस्था खतरे में पड़ गई है। पीजीआई उत्तर क्षेत्र का बेहतरीन संस्थान है और इस हड़ताल से उसकी बदनामी हो रही है। 1947 के अनिवार्य सेवा एक्ट के तहत कर्मचारियों की हड़ताल पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि हमें ऐसा कोई कारण दिखाई नहीं देता कि पीजीआई और यूटी प्रशासन काम पर न लौटने वालों पर कार्रवाई न करें। ऐसे में हाईकोर्ट ने कर्मियों को काम पर लौटने का आदेश दिया। साथ ही कर्मचारी यूनियनों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।