श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी से पहले 2015 में डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों ने संत बलजीत सिंह दादूवाल को मारने की साजिश रची थी। हालांकि यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी। यह खुलासा बेअदबी के मामलों की जांच को डीआईजी रणबीर सिंह खटड़ा की अगुवाई में गठित एसआईटी की रिपोर्ट में हुआ है। इसी संबंध में गठित जस्टिस रणजीत सिंह आयोग को एसआईटी जून में अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा ने मीडिया को एसआईटी रिपोर्ट की कॉपियां दीं। उन्होंने मांग की कि इस मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। रिपोर्ट के मुताबिक साजिश के पीछे मोहिंदर पाल बिट्टू का हाथ था, जोकि डेरे की 45 मेंबरी कमेटी का सदस्य था। कट्टरपंथी सिख उस दौरान डेरे के समागम नहीं होने दे रहे थे। इसके विरोध में डेरे के सदस्य हर्ष दूरी, प्रदीप कलेर और संदीप बरेटा ने मोहिंदर पाल बिट्टू से चर्चा की कि उन्हें दादूवाल पर हमला करना चाहिए।
वह डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ विरोध में सबसे आगे रहते थे। इन लोगों ने डेरा प्रमुख के निजी सहायक राकेश दिड़बा के निर्देश पर काम करना शुरू कर दिया। मोहिंदर पाल ने इसके लिए दो डेरा समर्थकों को चुना। भीखी जाकर दादूवाल के समामगम में उन्हें मारने की योजना बनाई गई। हमलावरों को भगाने का प्लान तैयार था। लेकिन जिला स्तरीय मीटिंग में प्लान पर चर्चा हुई तो सहमति नहीं बनी और इसे खारिज कर दिया गया।