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पंचकूला हिंसा: हम गहराई में जाएंगे तो कई चेहरे होंगे बेनकाब: हाईकोर्ट

Sun, 27 Aug 2017 03:41 PM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Ram Rahim Verdict
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साध्वी रेप केस में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद हिंसा पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई। तीन जजों की फुल बेंच ने कहा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदारी लेने के स्थान पर पंचकूला के डिप्टी पुलिस कमिश्नर को बलि का बकरा बनाकर उनको सस्पेंड कर दिया गया। पंचकूला में धारा-144 लागू करने के फैसले को गलत तरीके से ड्राफ्ट किया गया, यह गलती नहीं जानबूझकर किया गया काम प्रतीत हो रहा है। बिना राजनीतिक दबाव के ऐसा नहीं होता।
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यदि हम इस मामले की गहराई में जाएंगे तो कितने चेहरे बेनकाब होंगे, इसका अंदाजा हमें है। हमें यह पता है कि राजनीतिक निर्णय ने प्रशासनिक निर्णय को पंगु कर दिया था, जिसका नतीजा शहर ने ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा ने भुगता। कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास गृह मंत्रालय भी है। क्या उन्हें नहीं पता था कि शहर में इतनी बड़ी संख्या में बाहरी लोग और डेरा समर्थक पहुंच रहे हैं, जो कानून-व्यवस्था के लिए खतरा हो सकते हैं। इसके साथ ही प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के बयान को भी हाईकोर्ट ने गलत बताया।

साक्षी महाराज की टिप्पणियों पर जताई नाराजगी
सीबीआई कोर्ट और हाईकोर्ट के खिलाफ यूपी से सांसद साक्षी महाराज की टिप्पणियों पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि जो राजनीतिक प्रचार के भूखे हैं, उन्हें अपनी भूख मिटा लेने दो। हाईकोर्ट के एक वकील की ओर से साक्षी महाराज के बयान को न्यायालय की अवमानना बताते हुए उन पर अवमानना कार्रवाई की अपील पर अदालत ने यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि हम अपना काम कर रहे हैं और जो आलोचना करना चाहते हैं, करते रहें। हाईकोर्ट ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ओर से दिए गए बयान पर सवाल उठाए।
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भीड़ को भड़काने वालों में डेरा के प्रवक्ता का भी नाम

ram rahim
कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक समाचार पत्र की प्रति पेश की गई, जिसमें बताया गया कि डेरे के प्रवक्ता आदित्य इंसा सहित अन्य पांच ने समर्थकों को भड़काया था। आदित्य के साथ ही धीमान इंसा, दिलावर इंसा, पवन इंसा और मोहिंदर इंसा का नाम इसमें सामने आया है। हाईकोर्ट ने इस जानकारी पर हरियाणा के एजी को आदेश दिए कि रिपोर्टर अपनी रिपोर्ट पर कायम है तो इन पांचों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

सरकार ने रोया रोना
हरियाणा सरकार ने इन सभी आरोपों के बीच अपनी मजबूरियां गिनाना आरंभ किया। सरकार ने कहा कि हमारी कोशिश थी कि राम रहीम को किसी भी तरह कोर्ट में पेश होने दिया जाए। यदि ऐसा नहीं हो पाता तो सरकार पर उन्हें कोर्ट में पेश करने की जिम्मेदारी होती। उन्हें आश्रम से निकालने पर कहीं अधिक लोगों की जान जाने का खतरा था। इस मामले में सरकार ने पूरी गंभीरता से काम किया है।
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पुलिस बल की कमी रही बड़ा कारण

राम रहीम - फोटो : SELF
केंद्र सरकार ने कहा कि पुलिस बल की कमी के कारण राज्य सरकार स्थिति पर काबू पाने में पूरी तरह से कामयाब नहीं हुई। केंद्र सरकार ने पूरा समर्थन दिया था परंतु आंकड़ों को देखें तो पता चल जाता है। हरियाणा में पुलिस की मंजूर संख्या 56989 है, जबकि मौजूदा संख्या 37739 ही है। पंजाब के मामले में स्थिति कुछ बेहतर है और मंजूर 61720 पदों में से 54188 पद भरे हुए हैं।

कितनी गाड़ियां, कितने लोग और बिना चेकिंग कैसे घुसे
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा कि वे अगली सुनवाई पर यह बताएं कि आखिर राम रहीम के साथ कितनी गाड़ियों का काफिला था। हर गाड़ी में कितने लोग थे। सैकड़ों गाड़ियां बिना जांच के कैसे पंचकूला में घुसीं। साथ ही यह भी पूछा कि डेरा सच्चा सौदा के आश्रमों की पूरी तरह से जांच करने की हरियाणा और पंजाब सरकार के पास क्या योजना है। इससे पहले सीनियर एडवोकेट अनुपम गुप्ता ने कहा कि काफिले में केवल 5 वाहन हैं।

यह बात एजी ने कोर्ट में कही थी, जबकि मीडिया कवरेज से साफ है कि सैकड़ों गाड़ियों का काफिला डेरा मुखी को सिरसा से लेकर पंचकूला पहुंचा। एजी को काफिले में केवल 5 गाड़ियां होने की जानकारी देने वाले अधिकारी पर अवमानना की कार्रवाई की जानी चाहिए क्योंकि सैकड़ों वाहन बिना किसी जांच और इजाजत के शहर में प्रवेश कर गए थे।
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