चंडीगढ़। लंबा समय बीत जाने के बावजूद पीजीआई में नेशनल हेल्थ इंस्टीट्यूट स्थापित न करने को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसे संस्थान को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की ओर से पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में स्थापित किया जाना था।
याचिका दाखिल करते हुए डाॅ. जेसी मेहता ने बताया कि वह इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटल इंजीनियरिंग इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं और पीजीआई में अस्पताल अभियांत्रिकी विभाग की स्थापना में अग्रणी भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने स्वास्थ्य अवसंरचना के क्षेत्र में कई पुस्तकें लिखी हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकार भी रह चुके हैं। नेशनल हेल्थ इंस्टीट्यूट का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं की योजना, अनुसंधान, समन्वय, एकीकरण और प्रबंधन के लिए पेशेवर क्षमताओं का विकास करना है। इसमें दो प्रमुख मास्टर कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। पहला स्वास्थ्य सुविधा योजना और डिज़ाइन, दूसरा स्वास्थ्य देखभाल अभियांत्रिकी और प्रबंधन है। यह कोर्स न केवल इंजीनियरों, वास्तुकारों बल्कि डॉक्टरों, नर्सों, मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट जैसे अन्य पेशेवरों को भी प्रशिक्षित करेगा, जो अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रभावी संचालन में भूमिका निभाते हैं। विकसित देशों जैसे अमेरिका और ब्रिटेन में इस प्रकार के पाठ्यक्रम पहले से मौजूद हैं।
2006 में हुई थी घोषणा
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने 18 मार्च 2006 को पीजीआई में एक दीक्षांत समारोह के दौरान इस संस्थान की स्थापना की घोषणा की थी, लेकिन यह प्रस्ताव अभी तक अमल में नहीं लाया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत से अपील की है कि वैध अपेक्षा के सिद्धांत के तहत सरकार को अपने वादे पूरे करने के लिए बाध्य किया जाए। याची ने कहा कि भारत में अस्पताल अभियांत्रिकी और स्वास्थ्य अवसंरचना प्रबंधन की बढ़ती जरूरत को देखते हुए, इस संस्थान की स्थापना समय की मांग है। अगर यह संस्थान स्थापित होता है तो यह न केवल स्वास्थ्य देखभाल अवसंरचना के स्तर को बढ़ाएगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा।