चंडीगढ़। पंजाब राज्य कर्मचारी आयोग चंडीगढ़ के उपाध्यक्ष सुरिंदर कल्याण ने वीरवार को नगर निगम चंडीगढ़ का दौरा किया। इस दौरान नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार, संयुक्त आयुक्त डॉ. हिमांशु गुप्ता, एमओएच डॉ. इंदरप्रीत कौर के अलावा सफाई कर्मचारी यूनियनों और सफाई कर्मचारियों के पदाधिकारियों के साथ बैठक की।
इस दौरान कर्मचारियों को प्रभावित करनेवाले विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। नगर निगम के अधिकारियों ने उपाध्यक्ष को मौजूदा चुनौतियों से अवगत कराया। सफाई कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगें प्रस्तुत कीं।
एक प्रमुख मुद्दा अनुकंपा के आधार पर पिछले 18-20 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे लगभग 95 दिहाड़ी मजदूरों के नियमितीकरण को लेकर उठाया गया। साथ ही अन्य कर्मचारियों के बराबर मूल वेतन और महंगाई भत्ता (डीए) की मांग की।
यूनियन ने कहा कि सेवा के दौरान 375 सफाई कर्मचारियों की जान चली गई है, फिर भी उनके आश्रितों को स्थायी रोजगार देने के बजाय ठेकेदारों के अधीन काम करना पड़ रहा है। उन्होंने सभी आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों को नगर निगम के सीधे वेतनमान के अंतर्गत लाने की मांग पर भी जोर दिया।
बैठक में शहर की जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद, 1987 से स्वास्थ्य विभाग में स्थायी भर्ती न होने की समस्या पर भी ध्यान दिलाया गया। ड्राइवरों और आउटसोर्स किए गए सफाई कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी से संबंधित मुद्दों पर भी प्रकाश डाला गया।
सफाई कार्य में लगी एक निजी कंपनी के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गईं, जहां कथित तौर पर कर्मचारियों को आईडी-आधारित प्रणाली के माध्यम से बार-बार रोका जा रहा है और उनकी जगह दूसरे कर्मचारियों को भेजा जा रहा है, जिससे उन्हें अनुचित उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन ने इस प्रथा को तत्काल बंद करने की मांग की।
बैठक को संबोधित करते हुए सुरिंदर कल्याण ने इस बात पर जोर दिया कि सफाईकर्मी शहरी स्वच्छता की रीढ़ हैं। उन्हें नौकरी की सुरक्षा, सम्मान और उचित व्यवहार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों को सभी मुद्दों की प्राथमिकता के आधार पर जांच करने और नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। नगर निगम कमिश्नर ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।