दिल्ली के विधानसभा चुनाव में इस बार मुस्लिम समाज भी निर्णायक भूमिका अदा कर सकता है। राजनीतिज्ञ इस समाज को अपनी ओर आकर्षित करने में जुटे हैं। राजनैतिक विशलेषकों का मानना है कि दिल्ली में बैठे करीब चौदह प्रतिशत मुस्लिम वोटरों के हाथ में सत्ता की चाबी है।
अनुमान के अनुसार, दिल्ली प्रदेश के पंद्रह से तीस विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां मुस्लिम समाज के वोटर 22 हजार से लेकर चालीस हजार हैं और किसी भी उम्मीदवार को विजयश्री दिलाने और कड़ा मुकाबला दिलाने के लिए इतनी वोट काफी है।
यही वजह है कि पिछले कई दशकों से सियासी स्टेजों से प्रदेश की राजनीति अथवा विकास कार्यों पर चर्चा होने की बजाए धर्म के नाम पर वोट मांगे जाते रहे हैं और सत्ता पर काबिज होने के लिए कुछ राजनेता पिछड़ेवन का दर्द सहन करने वाले इस समाज को लुभाने में कामयाब भी हुए हैं किंतु इस बार के विधानसभा चुनाव के लिए राजनैतिक दल विभिन्न समाज के धर्मगुरूओं का भी आशीर्वाद लेने की कशमकश में लगे हुए हैं।