सरपंच के चुनाव में मिली हार के बाद मामले की अपील दायर की गई और करीब पौने दो साल चली पैरवी के बाद दोबारा हुई मतगणना में हारे प्रत्याशी को विजेता घोषित किया गया। हार-जीत का अंतर एक-दो वोट से नहीं बल्कि 200 से अधिक वोटों का रहा। अब चुनाव करवाने वाले अधिकारियों की कारगुजारी पर सवाल उठने लगे हैं। लोग कह रहे हैं कि लोकतांत्रिक देश में आखिर किस आधार पर हारे प्रत्याशी को विजेता घोषित किया गया।
जानकारी के अनुसार करीब पौने दो साल पहले गांव जनसूआ में सरपंच के चुनाव हुए थे। इस चुनाव के बाद अधिकारियों ने हंसराज को विजेता करार दिया था। वहीं हारे प्रत्याशी अमरजीत सिंह को लगा कि उसके साथ चुनाव अधिकारियों ने धोखा किया है और मामले को सख्ती से उठाने की ठानी। हारे प्रत्याशी अमरजीत सिंह ने एडवोकेट के मार्फत एसडीएम कोर्ट में चुनाव पिटीशन दायर की।
लगभग पौने दो साल चली पैरवी के बाद एडवोकेट की दलीलों से सहमत होते हुए एसडीएम की कोर्ट में मंगलवार को फिर से वोटों की गिनती करवाई। दोबारा हुई मतगणना का परिणाम देख सभी हैरान रह गए, क्योंकि अमरजीत सिंह को एक-दो नहीं बल्कि 200 से अधिक वोटों से विजेता करार दिया गया।
सरपंच अमरजीत ने कहा कि आखिरकर सच की जीत हुई और भ्रष्ट तरीका अपनाने वालों को मुंह की खानी पड़ी। भ्रष्ट अफसरों ने गलत तरीके से हंसराज को जीताकर लोकतंत्र की हत्या की है। विजेता करार दिए गए अमरजीत सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि एडवोकेट संजय बग्गा के जरिए करीब पौने दो साल की लड़ाई के बाद उन्हें यह इंसाफ मिला है।
मामले की जांच की जाएगी: एसडीएम
एसडीएम खुशदिल सिंह ने मंगलवार को हुई मतगणना में अमरजीत सिंह की जीत की पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले की जांच की जाएगी। जो भी अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।