पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बाल अधिकार सुरक्षा आयोग से पूछा है कि स्कूल बसों की मुकम्मल जांच क्यों नहीं हुई। जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस अजय तिवारी की बेंच ने आयोग को निर्देश दिया है कि जो बसें सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत खरी नहीं उतरती, उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।
दरअसल, पंजाब संबंधी रिपोर्ट में आयोग ने कहा कि बसों की जांच के दौरान स्कूलों ने बसों में सुरक्षित स्कूल वाहन नीति के तहत प्रावधान बनाने को 15 दिन का समय मांगा है।
इसी रिपोर्ट पर बेंच ने पूछा, जब पिछले साल दिसंबर में ही आदेश दे दिया गया था कि पूरे राज्य की स्कूल बसों की जांच की जाए और जहां खामी मिले, वहां तुरंत कार्रवाई की सिफारिश ट्रांसपोर्ट विभाग को की जाए, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई। फिलहाल, आयोग की ओर से स्कूलों की दलील पर विचार करते हुए बेंच ने दोबारा आदेश दिए हैं कि दिसंबर 2015 में जारी आदेश का सही पालन किया जाए।
अगली सुनवाई पर मुकम्मल रिपोर्ट मांगी है। उधर, पंजाब के ट्रांसपोर्ट सचिव से भी जवाब मांगा है कि स्कूल बसों में हाइड्रॉलिक दरवाजे लगाने को अब तक क्या कदम उठाए गए। यह भी पूछा है कि जिन बसों में हाइड्रॉलिक्स दरवाजे नहीं लग सकते, क्या यह बसें ऐसी स्थिति में सुरक्षित हैं या नहीं।
हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में छात्रों की ट्रांसपोर्टेशन कर रही स्कूल बसों में सुरक्षित स्कूल वाहन नीति के प्रावधान की जांच दोनों राज्यों एवं यूटी के बाल अधिकार सुरक्षा आयोग को सौंपी थी। अनियमितता मिलने पर आयोग को सरकारों से स्कूल बसों के चलने पर पाबंदी लगाने की सिफारिश करने को अधिकृत किया गया था।
इसके साथ ही दोनों राज्यों की सरकारों एवं यूटी को निर्देश दिया था कि आयोगों को शिक्षा विभाग व पुलिस का एक-एक अधिकारी भी मुहैया कराए और साथ ही वाहन भी उपलब्ध कराए। आयोगों से कहा था कि वह 15 फरवरी तक अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के सभी स्कूलों की बसों की जांच कर रिपोर्ट 15 फरवरी तक हाईकोर्ट में पेश करें।
साथ ही यह भी साफ किया था कि जांच जनहित में हो, अधिकारों का दुरुपयोग करके किसी को बेवजह परेशान न किया जाए। इससे पहले आयोगों को नोडल अधिकारी लगाने को कहा था, लेकिन आयोगों को सशक्त बनाते हुए नोडल अधिकारी लगाने का आदेश वापस ले लिया गया है।
लुधियाना में विज्ञापन कांट्रेक्ट विवादों में
लुधियाना में नगर निगम की ओर से दिए गए विज्ञापन साइट्स का ठेका विवादों के घेरे में आ गया है। हाईकोर्ट को बताया गया कि हरियाणा में सालाना कांट्रेक्ट से विज्ञापन के जरिए बड़ी राशि अर्जित होती है। गुड़गांव और फरीदाबाद में ही भारी-भरकम आय होती है। यहां तक कि पंचकूला में यह ठेका पांच करोड़ का गया, लेकिन लुधियाना में कई साइट्स सात साल के लिए महज दो करोड़ रुपये में नीलाम कर दी गईं। इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने सख्त नोटिस लेते हुए विज्ञापन साइट का टेंडर हासिल करने वाली कंपनी के जिम्मेवार व्यक्ति को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 21 अप्रैल को तलब कर लिया है।