चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में पांच साल से शोध कर रहे शोधार्थियों को थीसिस जमा करने के लिए यूजीसी से छह महीने का और समय मिल गया है। ये शोधार्थी पीयू के छात्रावासों में आना चाहते हैं, लेकिन इन्हें बुलाने को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि दो से चार दिन में तय हो जाएगा कि इन शोधार्थियों के लिए क्या नियम होंगे। कमरे का किराया किस हिसाब से लिया जाएगा। यह भी तय नहीं है। सूत्रों का कहना है कि पीयू इन शोधार्थियों से रोजाना के हिसाब से कमरे का किराया लेने की योजना बना रहा है जबकि नियमों में कुछ और है।
जून 2021 तक छात्रावासों में रह सकते रिसर्च स्कॉलर
बड़े शोध पर काम करने वाले रिसर्च स्कॉलर अभी अपने घरों पर हैं। उनकी थीसिस अब अंतिम चरण में है। कुछ ने थीसिस जमा कर दी थी तो कुछ को और समय चाहिए। ऐसे शोधार्थियों की संख्या पीयू में 400 से अधिक है। ये शोधार्थी कोरोना से पहले छात्रावासों में रह रहे थे, लेकिन लॉकडाउन के समय घर चले गए। इसके बाद से इन्हें नहीं बुलाया गया। तीन साल से रिसर्च में जुड़े शोधार्थियों को ही बुलाया गया था। पांच साल वाले रिसर्च स्कॉलर को इसलिए नहीं बुलाया गया क्योंकि उनका कार्यकाल पूरा हो गया था। पीयू प्रशासन ने भी सोच लिया कि उनकी थीसिस जमा हो गई होंगी। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण रिसर्च स्कॉलर थीसिस जमा कराने से रह गए। अब यूजीसी ने जून 2021 तक थीसिस जमा करने के लिए समय दे दिया है। ये शोधार्थी फिर से पीयू आना चाहते हैं ताकि वह अपना शेष रिसर्च का कार्य पूरा कर सकें और उन्हें गाइड भी मिल सके।
पीयू प्रतिदिन 80 रुपये के हिसाब से लेना चाहती है किराया
सूत्रों का कहना है कि पीयू इन रिसर्च स्कॉलर से प्रतिदिन 80 रुपये के हिसाब से किराया लेना चाहती है यानी माह में 2400 रुपये चुकाने होंगे। कुछ शोधार्थियों ने कहा कि उनसे पहले छह माह का 600 से 700 रुपये किराया लिया जाता था, लेकिन अब सुनने में आ रहा है कि कई गुना हो गया। ऐसे में उन्हें दिक्कतें होंगी। ऐसी स्थिति में वह पीयू नहीं आ पाएंगे। हालांकि जिनको एचआरए आदि की सुविधा मिली है वह विद्यार्थी हॉस्टलों में आ जाएंगे, क्योंकि उनको पैसे सरकार से स्कॉलरिशप या फेलोशिप के जरिए मिल रहे हैं। अन्य छात्रों ने मांग की है कि पहले की तरह छात्रावास का किराया लागू होना चाहिए।
किराया पूरा लिया तो सुविधाएं कहां से देंगे
सूत्रों का कहना है कि शोधार्थियों को छात्रावास का पूरा किराया फेलोशिप के जरिए मिलता है। जब पीयू एचआरए की पूरी रकम शोधार्थियों से लेगी तो उसके बदले में सुविधाएं भी देनी होंगी जो कि पीयू के छात्रावासों में नहीं हैं। इसके लिए सुविधाओं को बढ़ाना होगा। हालांकि यूजीसी से यह फेलोशिप अगले छह माह के लिए मिलेगी या नही, इसको लेकर असमंजस है।
क्या कहते हैं अधिकारी
पांच साल से शोध करने वाले शोधार्थियों को बुलाने को लेकर गाइडलाइन बन रही है। उच्च अधिकारियों से मंजूरी मिलने के बाद ही शोधार्थियों को बुलाया जाएगा।
- प्रो. एसके तोमर, डीएसडब्ल्यू,पीयू