पंजाब की कैप्टन सरकार की कर्ज माफी की घोषणा के बावजूद सूबे के कर्जदार किसानों के चेहरे का रंग उड़ा ही है। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की फसली ऋण माफी को किसान ऊंट के मुंह में जीरा मान रहे हैं।
चूंकि, किसानों पर कर्ज 90 हजार करोड़ का है और बजट में प्रावधान मात्र 1500 करोड़ रुपये का किया गया है। इससे किसान चाहकर भी कर्ज माफ होने की खुशी नहीं मना पा रहे। साथ ही सिर्फ पांच एकड़ तक वाले किसान का दो लाख रुपये ऋण माफ करने से भी किसान मायूस है। वे दस एकड़ तक भूमि वाले किसानों की कर्ज काफी की उम्मीद लगाए बैठे थे।
छोटे किसानों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि सरकार की घोषणा का लाभ बड़े किसान अधिक उठाएंगे। कर्जदार बड़े किसानों ने कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद माफी का अधिक लाभ उठाने के लिए कई हथकंडे अपनाए हैं। अनेक किसानों ने 40 या पचास एकड़ भूमि होने पर उसे पांच-पांच एकड़ कर अपने बीबी-बच्चों के नाम कर दिया है। ऐसे किसानों की संख्या मोटे तौर पर सूबे में दस फीसदी तक मानी जा रही है। इसके अलावा बैंकों का ही कर्ज माफ होने से किसानों में रोष है, क्योंकि अनेक लोगों ने साहूकार, आढ़ती, सहकारी समितियों और सुनारों के पास गहने गिरवी रखकर भी फसली कर्ज लिया हुआ है। ऐसे किसानों की संख्या 75 से 80 फीसदी है। इससे किसानों को कर्ज माफी ज्यादा लाभकारी नहीं दिख रही।