पीयू के पूर्व सीनेटर एवं यूआईएलएस विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अजय रंगा ने कहा कि डॉ. कोमल का शोषण किया गया है। वह दोषी नहीं थे लेकिन कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ के कारण उन्हें पीयू सीनेट में बर्खास्त करवाया। सीनेट ने उनके साथ गलत किया। कहा कि पीयू कैलेंडर के मुताबिक वह कार्रवाई से बच गए थे। सीनेट में उनके खिलाफ वोटिंग भी हुई थी पर कार्रवाई नहीं बनती थी। उन पर कार्रवाई करने के लिए फिर प्रस्ताव लाया गया।
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सीनेट में कुछ लोगों ने हाथ खड़े करके उनके खिलाफ बहुमत सिद्ध करने का काम किया और उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। मैंने कहा था कि वह दोषी नहीं हैं लेकिन नियमों को दरकिनार करके उसे सजा दी गई। सीनेट व उस समय के अधिकारी इसके लिए दोषी हैं। उन्हीं के कारण वह तनाव में गए और उनकी जान चली गई। इस प्रकरण की जांच सीबीआई से करवाई जाए। वर्तमान वीसी किसी सीनेटर या किसी अधिकारी से इसकी जांच न करवाएं। डॉ. कोमल को न्याय मिलना चाहिए।
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यौन शोषण के लगे थे आरोप, आवास के लिए मिला था स्टे
पीयू के पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर काम करने वाले डॉ. कोमल सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगे थे। जांच के बाद यह प्रकरण सीनेट में पहुंचा। सीनेट के आदेश के बाद विभाग ने उनसे विभागीय रूम खाली करवाया लिया लेकिन आवासीय रूम खाली नहीं करवाया जा सका। उसके लिए वह हाईकोर्ट पहुंचे थे लेकिन उनके पास वकील को केस लड़ने के लिए देने को पैसे नहीं थे। कुछ शिक्षकों ने चंदा उन्हें दिया था। केस लड़ा गया तो हाईकोर्ट ने आवास खाली करने पर स्टे दे दिया था। उसी के तहत चार साल से वह पीयू कैंपस सेक्टर 14 में रह रहे थे। कुछ लोगों का कहना है कि वह घर से कम ही निकलते थे। मानसिक परेशानी थी। पैसे का भी संकट था।
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