वहां पर प्रीतम सिंह व उनके बेटे की हालत खराब होने पर पहले उन्हें सिविल अस्पताल होशियारपुर लाया गया जहां से सात जुलाई को दोनों को अमृतसर रेफर कर दिया गया था, जबकि अन्यों को 10 दिन बाद घर भेज दिया गया। प्रीतम सिंह के बेटे को 16 जुलाई को अमृतसर से छुट्टी मिल गई और वह घर लौट आया। पारिवारिक सदस्यों के अनुसार शनिवार उन्हें फोन पर बताया गया कि प्रीतम सिंह की मौत हो गई है।
अमृतसर से शनिवार देर शाम शव मुकेरियां पहुंचा तो उसे सीधा श्मशामघाट पर लाया गया। इस दौरान उनके कुछ पारिवारिक सदस्य पीपीई किट पहने संस्कार में शामिल हुए। संस्कार से पहले परिवार वालों की मांग पर जब अंतिम दर्शन को बैग खोला गया तो सबके होश फाख्ता हो गए। वह जिस देह का संस्कार करने जा रहे थे वह प्रीतम सिंह का नहीं बल्कि किसी महिला का था।
परिवार वालों ने रोष जताया तो एसएमओ डॉ. जतिंदर कुमार, डीएसपी मुकेरियां, थाना प्रभारी व स्वास्थ्य विभाग की टीमें वहां पहुंच गई। दूसरी तरफ परिवार के सदस्य महिला का शव लौटाने को तैयार थे। खबर लिखे जाने तक वह इस बात पर अड़े थे कि पहले प्रीतम सिंह का शव उन्हें दिया जाए या कम से कम वीडियो कॉलिंग के माध्यम से दिखाया जाए। पारिवारिक सदस्यों का कहना है कि उन्होंने तो पीपीई किट पहन कर अंतिम दर्शन करने के लिए बैग खोल कर देख लिया। अगर वे ऐसा न करते तो उन्हें इस बात का कभी पता ही नहीं चलता। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के अधिकारी पारिवारिक सदस्यों को समझाने में जुटे हैं।