डेरा सच्चा सौदा सिरसा के परिसर में 600 नर कंकाल होने का सच सरकार पता लगाएगी। नर कंकालों को जमीन से बाहर निकालने से पहले डेरा प्रबंधन कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. पीआर नैन के खुलासे की तह तक भी जाया जाएगा।
नैन की एसआईटी को पूछताछ में दी जानकारी के बाद सरकार भी सकते में है। एसआईटी अब नैन से और गहन पूछताछ करेगी। चूंकि, उसने अपने खुलासे में यह दावा नहीं किया कि नर कंकाल मारे गए लोगों के हैं या नहीं। उसने एसआईटी को देहदान करने वाले लोगों का रिकार्ड सौंपा है। अब पुलिस यह पता लगाएगी कि नैन का दावा सच है या नहीं। डेरे में दबाए गए नर कंकाल मारे गए लोगों के हैं, या फिर नदी से उठाकर लाकर दफनाए गए। इसकी तह तक भी जाने की तैयारी में है कि कितने लोगों ने स्वेच्छा से देहदान किया है।
नैन की चौंकाने वाली जानकारी के बाद बुधवार को चंडीगढ़ में उच्च स्तरीय बैठकों का दौर चला। गृह सचिव और डीजीपी की भी लंबी बैठक हुई। इसमें नैन की जानकारी के सभी पहलुओं पर गंभीर मंथन किया गया है। चूंकि, डेरे के पूर्व सेवादार गुरदास सिंह अंग अंग तस्करी के आरोप डेरा पर लगा चुके हैं।
'नैन के सच या झूठ की करेंगे पुष्टि'
Haryana DGP BS Sandhu
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वह बार-बार दावा कर रहे हैं कि डेरामुखी उनके खिलाफ आवाज उठाने वालों को मरवा कर डेरे के अंदर ही दफन करा देता था। जिन नरकंकाल के डेरे के भीतर जमीन में दबे होने की बात डॉ. नैन ने की है, उनमें अधिकांश मारने के बाद ठिकाने लगाए गए लोगों के हैं।
गुरदास के अनुसार देहदान करने वालों के शरीर के अंगों की तस्करी भी की जाती थी। देहदान करने वालों की मृत्यु के बाद डॉक्टर शवगृह में जाकर शवों से छेड़छाड़ करते थे। अब सरकार इन सभी दावों की हकीकत जानने का मन बना चुकी है। नैन अगर अपने खुलासे पर कायम रहता है तो एसआईटी कोर्ट कमिश्नर से अनुमति लेकर डेरे की खुदाई कर नर कंकालों को निकाल सकती है।
नैन के सच या झूठ की करेंगे पुष्टि : संधू
डीजीपी बलजीत सिंह संधू ने कहा कि डॉ. पीआर नैन की जानकारी कितनी सच और कितनी झूठ, कोई भी कदम उठाने से पहले उसकी पुष्टि की जाएगी। एसआईटी अभी उससे और पूछताछ करेगी। उसने यह नहीं कहा है कि यह कंकाल मारे गए लोगों के हैं। डेरा दावा करता है कि अस्थियां विसर्जित करने से पानी प्रदूषित न हो, इसलिए उन्हें उठाकर लाने के बाद डेरे के भीतर दबाया जाता था।