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बहु-बेटियों ने दिया 87 साल की दादी मां की अर्थी को कांधा

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पांच बेटों व बीस से ज्यादा पोतों व पड़पोते-पड़पोतियों वाली सरबती देवी को उसकी बहुओं एवं बेटियों ने कंधा दिया। इसके बाद फिर दोहतियां व पोतियां। अंत में बेटों व पोतों ने उनकी अर्थी को संभाला व अपने परिवार की सबसे बड़ी मेंबर का अंतिम संस्कार करवाया। सरबती देवी ने डेरे की एक सामाजिक मुहिम से प्रभावित होकर अपने जीवन काल में यह इच्छा जाहिर की थी कि उनकी मौत के बाद उन्हें बहु बेटियों के कांधों पर शमशान भूमि तक ले जाया जाए।
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हाउसिंग बोर्ड कालोनी से जब सरबती देवी की अर्थी को लेकर जब उनकी बहुएं लेकर चलीं तो शहर के बहुत सारे लोग इसे देखने के लिए बाहर आ गए। 87 साल की सरबती देवी जाते-जाते अपनी आंखें भी दान करके गई हैं।
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दुनिया को रोशन करेंगी सरबती देवी की आंखें

वे कई साल पहले अपनी आंखें दान कर चुकी थीं। जिसके तहत उनकी मौत की सूचना के बाद डेरा सच्चा सौदा सिरसा के नेत्र बैंक की टीम पहुंची और उनकी आंखों को सुरक्षित रख लिया। उसके बाद सरबती देवी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। सरबती के पांच बेटे हैं। जिनका भरा पूरा परिवार है। इसके बावजूद भी महिलाओं ने उनकी अर्थी को कंधा देकर अनूठा उदाहरण पेश किव्या है।

सरबती देवी के पोते अखिल गुप्ता ने कहा कि उनकी दादी की अंतिम इच्छा के चलते उन सब ने इसमें सहयोग किया। उनकी दादी की इच्छा के अनुसार उनकी बहुओं ने कांधा दिया है। सारे परिवार को यही खुशी है कि अब दादी अम्मा किसी और की आंखों से इस संसार को देखा करेंगी।
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