पांच बेटों व बीस से ज्यादा पोतों व पड़पोते-पड़पोतियों वाली सरबती देवी को उसकी बहुओं एवं बेटियों ने कंधा दिया। इसके बाद फिर दोहतियां व पोतियां। अंत में बेटों व पोतों ने उनकी अर्थी को संभाला व अपने परिवार की सबसे बड़ी मेंबर का अंतिम संस्कार करवाया। सरबती देवी ने डेरे की एक सामाजिक मुहिम से प्रभावित होकर अपने जीवन काल में यह इच्छा जाहिर की थी कि उनकी मौत के बाद उन्हें बहु बेटियों के कांधों पर शमशान भूमि तक ले जाया जाए।
हाउसिंग बोर्ड कालोनी से जब सरबती देवी की अर्थी को लेकर जब उनकी बहुएं लेकर चलीं तो शहर के बहुत सारे लोग इसे देखने के लिए बाहर आ गए। 87 साल की सरबती देवी जाते-जाते अपनी आंखें भी दान करके गई हैं।