पंजाब विधानसभा चुनाव में सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने की कोशिश में जुटी कांग्रेस के लिए पार्टी के ही कुछ हठी नेता खतरा बनते नजर आ रहे हैं। 21 जनवरी को नामांकन वापसी का आखिरी दिन था। बावजूद इसके पार्टी के दस से ज्यादा बागी आजाद उम्मीदवारों ने हाईकमान की चेतावनी को नजरअंदाज कर मैदान में डटना ही मुनासिब समझा।
इस बीच पंजाब की इंचार्ज आशा कुमारी, सह प्रभारी हरीश चौधरी ने कई नाराज नेताओं को मनाने की मंशा से उनसे बात भी की। प्रदेश कांग्रेस प्रधान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कई लोगों से फोन पर बात की। इस पर करीब पंद्रह नेताओं ने तो नामांकन वापस ले लिए, लेकिन दस से ज्यादा लोगों ने पार्टी से बगावत कर आजाद उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस उम्मीदवारों के खिलाफ ताल ठोंक दी है।
इससे पहले कैप्टन ने चेतावनी दी थी कि अगर नामांकन वापस न लिए गए तो इन लोगों को पार्टी से बेदखल कर दिया जाएगा, लेकिन उसका भी इन पर कोई असर नहीं हुआ। जाहिर है पार्टी की मर्जी के बगैर मैदान में डटे इन नेताओं की वजह से कांग्रेस के घोषित उम्मीदवारों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।