पत्रकारों की तरफ से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत दौरे के बारे में पूछे सवालों के जवाब में दलाई लामा ने कहा- भारत और चीन दुनिया के सबसे बड़ी आबादी वाले देश हैं, जिसके चलते इनका बातचीत के मंच पर इकट्ठा होना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि वह शुरू से ही बातचीत के द्वारा दो तरफे मसलों के हल करने के पक्षधर हैं और उम्मीद है कि भविष्य में भारत-चीन की बातचीत के सार्थक नतीजे सामने आएंगे। व्यापारिक कारणों से दोनों देश एक दूसरे पर निर्भर हैं, जिसके चलते भारत-चीन का एक दूसरे के बिना गुजारा नहीं हो सकता। अर्थव्यवस्था की उन्नति के लिए यह जरूरी भी है।
नेताओं को बोलने में संयम बरतना चाहिए
दलाई लामा ने कहा कि पाकिस्तान को अपने पड़ोसी मुल्क से बेहतर संबंध बनाने चाहिए। यह बातचीत के द्वारा ही संभव है। दलाई लामा ने यूएन के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विनम्रता, संयम और सहजता की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि यूएन में मोदी द्वारा बौद्ध धर्म का उदाहरण के साथ शांति की बात करने के बड़े मायने हैं, जबकि इसके उलट पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की तरफ से जज्बाती भाषण देने से अच्छा संदेश नहीं गया। उन्होंने कहा कि विश्वभर के नेताओं को बोलते वक्त संयम से काम लेना चाहिए और जज्बाती भाषण से परहेज करना चाहिए है।