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Chandigarh: पार्किंग घोटाले से ली सीख, नए टेंडर में बड़ा बदलाव, पर्ची के पैसे अब निगम के खाते में आएंगे

Thu, 06 Apr 2023 01:52 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि पैसों के भुगतान से पहले नगर निगम की तरफ से बिल की जांच की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कंपनी ठीक से काम कर रही है या नहीं। उसके आधार पर ही कंपनी के बिलों को पास किया जाएगा।
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चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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चंडीगढ़ नगर निगम एक बार फिर शहर की सभी 89 पार्किंग स्थलों को ठेके पर देने जा रहा है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और सदन की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इस बार निगम ने टेंडर की लगभग सभी शर्तों में कई प्रस्तावित बदलाव किए हैं। सबसे अहम यह है कि शहर की सभी पार्किंगों से जो रोजाना पैसों का कलेक्शन होगा, वो अब ठेकेदार के पास न जाकर नगर निगम के पास आएंगे।

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साथ ही बुधवार को फैसला हुआ है कि नगर निगम की सदन की बैठक 11 अप्रैल को सुबह 11 बजे होगी। अमर उजाला ने बुधवार के अंक में सदन की बैठक नहीं बुलाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद मेयर अनूप गुप्ता ने 11 अप्रैल को बैठक बुलाने के निर्देश निगम की आयुक्त आनिंदिता मित्रा को दिए हैं। बैठक के आयोजन को तैयार शुरू हो गई है। बैठक में 89 पार्किंगों को ठेके पर देने का प्रस्ताव लाया जाएगा। साथ ही प्रस्ताव हेतु अनुरोध (आरएफपी) फ्लोट करने की मंजूरी भी मांगी जाएगी। 

निगम की आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि आरएफपी लगभग तैयार है और सदन की मंजूरी मिलते ही इसी महीने में फ्लोट कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि सदन के सामने टेंडर के बुनियादी फीचर्स की एक प्रेजेंटेशन भी दी जाएगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। बता दें कि इस बार की सदन की बैठक काफी हंगामेदार रह सकती है, क्योंकि पार्किंग घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षद भाजपा पर हमलावर है। दोनों पार्टियां मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। साथ ही निगम के किन अधिकारियों की मिलीभगत है, उनके नाम सार्वजनिक करने की मांग पर भी पार्षद अड़े हुए हैं। निगम की पिछली बैठक भी हंगामे की भेंट चढ़ गई थी।
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हर महीने बनेगा बिल, जांच के बाद निगम करेगा भुगतान
अब तक जितने भी पार्किंग के ठेके दिए गए हैं, उसमें रोजाना के पैसों का कलेक्शन कंपनी करती थी और महीने में निगम को फीस देती थी। इस शर्त की वजह से निगम ठेकेदार पर निर्भर था और इसी वजह से ठेकेदार बीच-बीच में निगम को पैसे नहीं देता था और निगम को कंपनी के पीछे-पीछे घूमना पड़ता था। 

अधिकारियों का कहना है कि पिछले टेंडर के बेसिक ही ठीक नहीं थे। अब उन्हें पूरी तरह से बदल दिया गया है। अब शहर की विभिन्न पार्किंगों से जो रोजाना पैसों का कलेक्शन होगा वो अब ठेकेदार के पास न जाकर नगर निगम के पास आएंगे। हर महीने ठेकेदार बिल बनाएगा और उसके आधार पर नगर निगम की तरफ से भुगतान किया जाएगा। 

निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि पैसों के भुगतान से पहले नगर निगम की तरफ से बिल की जांच की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कंपनी ठीक से काम कर रही है या नहीं। उसके आधार पर ही कंपनी के बिलों को पास किया जाएगा। इससे ठेकेदार पर निर्भरता खत्म हो जाएगी।
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पार्किंग घोटाले की विभागीय जांच की रिपोर्ट भी बैठक के दौरान होगी पेश
पार्किंग घोटाले में पुलिस के साथ नगर निगम की विभागीय जांच भी चल रही है कि किन अधिकारियों व कर्मचारियों की वजह से नगर निगम को सात करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आयुक्त मित्रा ने कहा कि 11 अप्रैल को होने वाली सदन की बैठक से पहले विभागीय जांच पूरी हो जाएगी और रिपोर्ट को सदन में पेश किया जाएगा। बता दें कि पार्किंग घोटाले मामले में पुलिस ने अब तक फर्जी बैंक गारंटी का मास्टरमाइंड अनिल शर्मा, पाश्चात्य एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक संजय शर्मा, बैंक ऑफिसर रविचंद्र प्रकाश, अजय, विकास पांडे, अंशुल मिश्रा और करण शर्मा को गिरफ्तार किया है। सभी दिल्ली के रहने वाले हैं।

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