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चंडीगढ़ के हर थाने में बनेगा साइबर डेस्क, तेजी से होगा साइबर क्राइम के केसों का निपटारा 

Thu, 07 Jan 2021 12:22 PM IST
निवेदिता वर्मा अमित गुप्ता, अमर उजाला, चंडीगढ़
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साइबर क्राइम - फोटो : Demo
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चंडीगढ़ में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। इस पर नकेल कसने के लिए यूटी पुलिस तैयारियों में जुट गई है। इसके तहत अब शहर के अलग-अलग थानों में साइबर डेस्क बनाया जाएगा। थाने में आने वाली साइबर ठगी की शिकायतों पर यह साइबर डेस्क अपने स्तर पर जांच कर केसों का निपटारा करेगा। अधिकारियों के अनुसार, फरवरी महीने तक इसकी शुरुआत कर दी जाएगी। 

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साइबर सेल में आने वाली शिकायतें साल दर साल लगभग दोगुनी होती जा रही हैं। फोन पर धमकी, फर्जी नाम से सोशल मीडिया का इस्तेमाल, एटीएम पिन पूछना, एटीएम कार्ड बदलकर पैसा निकालना समेत अन्य छोटे मोटी ठगी का साइबर सेल में ढेर लगा होता है। इसकी वजह से केसों को निपटारा करने में हफ्ते भर या कई बार महीनों तक का समय लग जाता है। 

इससे शिकायतकर्ता को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस तरह की शिकायतों को थाने स्तर में निपटारा करने के लिए साइबर अपराध ने प्रस्ताव भेजा था। सूत्रों का कहना है कि डीजीपी संजय बेनीवाल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके चलते अब शहर के अलग-अलग थानों में साइबर डेस्क बनाया जाएगा।  
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पुलिसकर्मियों को दिया गया है प्रशिक्षण  
चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित पुलिस लाइन में करीब 135 पुलिसकर्मियों को सात दिन और करीब 400 पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध के बारे में बेसिक प्रशिक्षण दिया गया है ताकि साइबर अपराध पर नकेल कसी जा सके। अलग-अलग थानों में बने इन डेस्कों पर दो से तीन पुलिसकर्मियों की तैनाती हो सकती है। 

ये पुलिसकर्मी अपने स्तर पर आने वाली ठगी की जांच करने के अलावा आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। साथ ही पीड़ित को अब अपने थाना क्षेत्र के साइबर डेस्क में जाकर शिकायत देने में आसानी होगी जबकि इससे पहले वह सेक्टर-17 साइबर सेल और सेक्टर-9 पुलिस मुख्यालय में चक्कर काटते रहते थे। 

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114 शिकायतों पर एक पुलिसकर्मी

प्रत्येक वर्ष साइबर सेल में आने वाली शिकायतों का आंकड़ा दोगुने की रफ्तार से बढ़ता जा रहा है लेकिन केस के निपटारे का आंकड़ा काफी कम है। इसकी एक वजह यह भी है कि साइबर सेल में अभी लगभग 55 पुलिसकर्मियों की तैनाती है। 2020 में साइबर सेल को 6300 से ज्यादा शिकायतें मिली थी। यानी सिर्फ एक पुलिसकर्मी औसत 114 शिकायतों पर काम कर रहा है, जो काफी बड़ा आंकड़ा है। वहीं अगर कुछ और पुलिसकर्मियों की साइबर सेल में तैनाती कर दी जाए, तो यह आंकड़ा काफी हद तक कम हो सकता है। 

सालों से लटका हुआ है साइबर थाना बनाने का प्रस्ताव
साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों को देखते हुए वर्ष 2018 में पुलिस विभाग ने शहर में अलग से साइबर थाना बनाने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन अब तक प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। हैदराबाद, बंगलौर, जयपुर समेत अन्य शहरों में साइबर अपराध से निपटने के लिए अलग से पुलिस थाना बना है। जबकि चंडीगढ़ में ऐसा नहीं है, साइबर सेल पुलिसकर्मी का कहना है कि अगर अलग से थाना बन जाए तो काफी हद साइबर अपराधों में कमी आ सकती है। 

ये ठगी सबसे ज्यादा 
बता दें कि साल 2020 में साइबर ठगी के करीब 6300 शिकायतें आई थीं, जिनमें सबसे ज्यादा कार्ड क्लोनिंग, एटीएम पिन, ऑनलाइन शॉपिंग, अकाउंट हैकिंग, ऑनलाइन नौकरी, ओएलएक्स पर खरीददारी, ऐनी डेस्क सॉफ्टवेयर समेत अन्य तरह की ठगी के मामले शामिल थे। इनमें ज्यादातर ऐसी ठगी है, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
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