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किसान आंदोलन से सीटीयू को हो रहा घाटा

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चंडीगढ़। कोरोना काल में पहले ही घाटा झेल रहे चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) को किसानों के आंदोलन के कारण भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों को दिल्ली सीमा पर बैठे ढाई महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, जिससे सीटीयू बसों का संचालन प्रभावित है। प्रदर्शन की वजह से दिल्ली समेत कई शहरों को जाने वाली सीटीयू की बसें नहीं चल पा रही हैं। हालांकि स्थानीय मार्गों पर बसों के चलने से कुछ राहत जरूर मिली है।
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दरअसल, कोरोना काल के दौरान सीटीयू ने सभी स्थानीय मार्गों के लिए एक ही किराया 20 रुपये तय कर दिया था, ताकि पैसों का लेन-देन कम हो और सभी कोरोना से बचे रहें। हालांकि कुछ दिनों पहले ही विभाग ने फिर से पुराने किराए को लागू कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, स्थानीय बसों से सीटीयू को रोजाना 50 हजार रुपये के करीब आमदनी होने लगी है जबकि कोरोना से पहले स्थानीय बसों से रोजाना करीब 80 हजार की आमदनी होती थी। सीटीयू के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थानीय मार्गों पर सवारियों की संख्या भी बढ़ेगी। हालांकि सीटीयू को स्थानीय मार्गों पर शुरू से घाटा ही होताआया है।
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किसान आंदोलन की वजह से 40 प्रतिशत मार्ग प्रभावित
परिवहन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, दिल्ली के करीब 100 मार्गों पर सीटीयू की लंबी दूरी की बसें चलती थीं लेकिन किसान आंदोलन की वजह से कई मार्गों पर बसें प्रभावित हुई हैं। जानकारी के अनुसार, करीब 55 से 60 मार्गों पर बसों को शुरू कर दिया गया है लेकिन 40 के करीब मार्गों पर अभी भी बसें नहीं चल रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही आंदोलन समाप्ति की ओर बढ़ेगा तो दोबारा से इन मार्गों पर भी सीटीयू की बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
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