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सीटीयू कैसे होगा कैशलेस, कंडक्टरों को भी नहीं दी गई ट्रेनिंग

Sun, 25 Dec 2016 06:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सीटीयू बस - फोटो : file photo
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सरकार का हुकम है कि व्यवस्था कैशलेस होनी चाहिए। मगर इसमें सबसे बड़ा रोड़ा सरकारी विभागों की शैली ही बन रही है। सीटीयू के बेड़े में रोज 520 बसें लांग रूट और लोकल रूट पर चलती हैं। इन सभी में टिकट कैश लेकर ही काटी जाती है। 
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कैशलेस व्यवस्था का आदेश मिलने के बाद सीटीयू ने 15 स्वाइप मशीनें ली हैं। बस स्टैंड के काउंटर पर इनसे पास बनाए जाते हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि 15 दिसंबर से ट्रायल शुरू कर दिया गया है। कंडक्टरों को ट्रैनिंग दे रहे हैं। वह दिन जल्द आएगा, जब सीटीयू में भी कैशलेस व्यवस्था होगी। सीटीयू की मौजूद व्यवस्था पर प्रस्तुत है योगेंद्र त्रिपाठी की रिपोर्ट

सीटीयू की बसों को कैशलेस बनाने का सपना अभी पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। सेक्टर-17 और 43 स्थित दोनों बस स्टैंडों पर लगाई गईं 15 स्वाइप मशीनें हैंग हो रही हैं। बस पास के लिए कार्ड से पैमेंट ली जाती है मगर मशीनें हैंग हो जाने से काम ही अटकता रहता है।
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लांग रूट की बसों का नहीं मिला टिकट

कैशलेस - फोटो : social media
इस कारण लोगों को परेशानी हो रही है। बस पास बनवाने आए सेक्टर-45 के कपिल शर्मा ने बताया कि उनके पास पैसे नहीं थे। कार्ड से पेमेंट नहीं हो पाई। सेक्टर-17 के लोकल बस स्टैंड से सफर करने वाली मीनाक्षी और पल्लवी ने बताया कि सीटीयू की बसों में कैशलेस व्यवस्था नहीं है। नोटबंदी से नकदी का संकट बना हुआ है। ऐसे में सीटीयू को डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान लेने की व्यवस्था करनी चाहिए। 

कंडक्टरों को नहीं दी गई ट्रेनिंग
सीटीयू के पास 500 कंडक्टर है। लेकिन अभी तक उन्हें स्वाइप मशीनों को हैंडिल करने की ट्रेनिंग नहीं दी गई है। इस कारण ये मशीनें चल नहीं पा रही हैं। वैसे भी सिर्फ 15 मशीनों से 500 कंडेक्टरों की जरूरत पूरी नहीं होगी। सीटीयू को कैशलेस व्यवस्था बनाने के लिए कम से कम ऐसी 400 मशीनों की जरूरत पड़ेगी। 

सीटीयू बस पास काउंटर के इंचार्ज कुलदीप सिंह ने बताया कि मशीन हैंग हो रही हैं। इस कारण इससे पेमेंट नहीं ले पा रहे हैं। 15 मशीनों में सेक्टर-17 में पांच, सेक्टर-43 में पांच और कंडक्टर को ट्रेनिंग देने के लिए पांच मशीनें इस्तेमाल हो रही हैं।

लांग रूट की बसों का नहीं मिला टिकट
दिल्ली, अमृतसर, लुधियाना का टिकट भी यात्रियों को स्वाइप मशीनों से नहीं दिया जा रहा है। कंडक्टर को कैशलेस की ट्रेनिंग करने के केवल पांच मशीनें ही काम आ रही है। इस कारण इस तरह की समस्या बनी हुई है। सेक्टर-38 के रहने वाले अभिनंदन, संयम ने बताया सेक्टर-43 बस स्टैंड पर उन्हें अमृतसर, दिल्ली के लिए स्वाइप मशीन से टिकट नहीं मिला। कैश नहीं होने के कारण उन्हें एटीएम जाकर कैश लाना पड़ा। यही हाल लोकल रूट पर है।  
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रोज एक लाख 80 हजार यात्री

कैशलेस पेमेंट
रोज एक लाख 80 हजार यात्री
सीटीयू की लोकल रूट की बसों में हर दिन करीब डेढ़ लाख लोग सफर करते हैं। लोकल बस सेवा 74 रूटों पर है। इन बसों के लिए कोई कैशलेस व्यवस्था नहीं शुरू हो पाई। बस पास के लिए यह व्यवस्था जरूर शुरू की गई है। मगर रोज सिर्फ हजार पास ही बनते हैं। 

छात्रों के लिए मंथली पास योजना है और कुल तीस हजार पास बनते हैं।  लांग रूट की बसों में 30 हजार लोग सफर करते हैं। इन बसों में केवल लुधियाना, अमृतसर और दिल्ली रूट पर टिकट मिलता है। बाकि हरिद्वार, देहरादून, शिमला सहित अन्य राज्यों के लिए जाने वाली बसों पर यह योजना शुरू नहीं की गई है।

सीटीयू की बसों में कैशलेस का ट्रायल 15 दिसंबर से शुरू कर दिया है। जल्द ही बसों को कैशलेस बनाएंगे। इसके लिए कंडक्टरों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। जल्द ही एडवांस टिकट की बुकिंग भी शुरू कर देंगे। कैशलेस करने के लिए हमें जल्द ही प्रशासन की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराया जाएगा। -अमित तलवार, निदेशक, सीटीयू
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