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Chandigarh News: पशु प्रेम के नाम पर क्रूरता, पिंजरों में कैद थे खरगोश

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चंडीगढ़। पशु प्रेम के नाम पर मासूम खरगोशों के साथ क्रूरता का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। सेक्टर 33 के एक घर में 38 खरगोशों को तंग पिंजरों में कैद कर रखा गया था। पशु क्रूरता निवारण सोसाइटी (एसपीसीए) की टीम ने छापा मारकर कर इन खरगोशों को मुक्त कराया और अपने कब्जे में लिया। पिंजरों में साफ-सफाई का अभाव था। पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं थी और कुछ खरगोशों के कान कटे हुए थे।
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तंग पिंजरों में ठूंसे गए थे खरगोश
एसपीसीए के इंस्पेक्टर धर्मेंद्र डोगरा ने बताया कि सेक्टर 33 के एक घर के सर्वेंट क्वार्टर में यह अमानवीय कृत्य हो रहा था। घर के मालिक बाहर रहते हैं और यहां रहने वालों ने कुछ समय पहले एक-दो खरगोश पाले थे। समय के साथ इनकी संख्या बढ़कर 38 हो गई। इन्हें छोटे-छोटे पिंजरों में ठूंसकर रखा गया था जहां एक पिंजरे में दो खरगोश की जगह चार-पांच को बंद किया गया था। पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति की शिकायत पर एसपीसीए ने त्वरित कार्रवाई की। शिकायतकर्ता ने मेल के जरिये बताया कि खरगोशों को अस्वस्थ हालात में रखा जा रहा है।

साफ-सफाई और पानी तक का अभाव
एसपीसीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर देखा कि पिंजरों में साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं था। खरगोशों के लिए पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं था। कुछ पिंजरों में खरगोशों के कान कटे हुए थे, जो उनकी पीड़ा को दर्शाता था। सभी 38 खरगोशों को पिंजरों समेत एसपीसीए ने अपने कब्जे में लिया। इन्हें जल्द ही किसी एनजीओ को सौंपा जाएगा जो इनकी बेहतर देखभाल कर सके।
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कानूनी कार्रवाई शुरू, काटा चालान
एसपीसीए ने खरगोशों को अमानवीय परिस्थितियों में रखने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए) 1960 के तहत चालान काटा गया है। इंस्पेक्टर धर्मेंद्र डोगरा ने बताया कि आरोपियेां को अब कोर्ट में जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि एसपीसीए पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने के लिए समय-समय पर ऐसी कार्रवाई करता रहता है।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहला मौका नहीं है जब एसपीसीए ने पशुओं के प्रति क्रूरता के खिलाफ कदम उठाया हो। इसी साल फरवरी में सेक्टर 17 के परेड ग्राउंड में आयोजित डॉग शो के बाहर एक कार की डिक्की में बंद 12 नस्लीय कुत्तों के बच्चों को मुक्त कराया गया था। इनमें 11 बच्चे एक कार की डिक्की में और एक दूसरी कार में बिना खाना, पानी और हवा के बंद थे।

पशु प्रेम या क्रूरता?
पशु प्रेम के नाम पर मासूम जीवों को तंग पिंजरों में कैद करने के मामले में कई सवाल उठ रहे हैं। एसपीसीए की इस कार्रवाई ने एक बार फिर समाज को यह सोचने पर मजबूर किया है कि पशुओं के प्रति सच्चा प्रेम उनकी देखभाल और सम्मान में है न कि उन्हें यातना देने में।
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