कॉलोनी काटने की अनुमति देने की एवज में पांच लाख रुपये रिश्वत लेता डीटीपी (जिला नगर योजनाकार) विक्रम सिंह रंगे हाथों पकड़ा गया। स्टेट विजिलेंस ने डीटीपी को सेक्टर-6 स्थित उसके आवास से ही शुक्रवार सुबह गिरफ्तार किया है। उसके ड्राइवर बलबीर को भी पांच हजार रिश्वत लेते दबोचा है।
डीटीपी के घर से 78.64 लाख रुपये, आभूषण, कृषि भूमि, एक फ्लैट और 12 प्लॉट से संबंधित दस्तावेज बरामद हुए हैं। शेयरों, म्यूचुअल फंड और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के दस्तावेज भी मिले हैं। विजिलेंस ब्यूरो के एसपी राजेश फौगाट ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि गहन पूछताछ की जा सके।
विजिलेंस टीम में शामिल निरीक्षक सचिन ने बताया कि पानीपत निवासी परमजीत ने शिकायत दी थी कि वह कॉलोनाइजर हैं और कॉलोनी काटने की एवज में डीटीपी दस लाख रुपये रिश्वत मांग रहा है। कॉलोनी काटने से पहले डीटीपी से अनुमति जरूरी है। परमजीत ने रुपये देने में असमर्थता जताई थी। शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेते हुए विजिलेंस ने डीटीपी और उसके ड्राइवर को सुनियोजित ढंग से रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। डीटीपी विक्रम करीब चार साल से करनाल में तैनात है।
कार्रवाई पर बांटी बर्फी, मनाई खुशी
डीटीपी और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर विजिलेंस सेक्टर-7 स्थित अपने कार्यालय लेकर गई थी। इस बात की सूचना मिलने पर बुढाखेड़ा निवासी सतनारायण पांचाल दोपहर को विजिलेंस के कार्यालय के बाहर पहुंचे। यहां उन्होंने डीटीपी के खिलाफ हुई कार्रवाई पर बर्फी बांटकर खुशी मनाई। वेल्डिंग का काम करने वाले सतनारायण ने कहा कि उन्होंने बैंक से 15 लाख रुपये लोन लेकर अपने गांव में मकान बनाना शुरू किया था, जिसे डीटीपी ने बनने नहीं दिया। डीटीपी रिश्वत मांग रहे था और रुपये न मिलने पर दो बार उनका निर्माण गिराया।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए चर्चा में था डीटीपी
अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए डीटीपी विक्रम लंबे समय से चर्चा में था। आरोप यह भी लगते थे कि जब डीटीपी को रिश्वत नहीं मिलती थी तो ही कार्रवाई होती थी। पिछले दिनों वार्ड नंबर दो के पार्षद बलविंद्र सिंह के साथ भी उनका कॉलोनी में निर्माण ढहाने को लेकर विवाद हुआ था।
ढाई करोड़ रुपये की रिश्वत की भी अफवाह
कार्रवाई के बाद से शहर में अफवाह है कि डीटीपी के घर से ढाई करोड़ रुपये भी बरामद हुए हैं लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विजिलेंस के इंस्पेक्टर सचिन का कहना है कि टीम घर के अलावा और भी कई जगहों पर जांच कर रही है। ढाई करोड़ रुपये बरामद होने की बात सिर्फ अफवाह है।