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अमृतसर केंद्रीय जेल की दीवार तोड़ तीन कैदी फरार, सात कर्मचारी निलंबित, सुरक्षा-व्यवस्था बढ़ी

Sun, 02 Feb 2020 06:58 PM IST
ajay kumar हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर।
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प्रदेश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अमृतसर केंद्रीय जेल से शनिवार देर रात घनी धुंध का सहारा लेकर तीन कैदी फरार हो गए। इस घटना से पुलिस और जेल प्र्रशासन में हड़कंप मच गया है। इस मामले में  दो सहायक जेल सुपरिंटेंडेंट, चार वार्डन और एक होम गार्ड को निलंबित कर दिया गया है जबकि जेल के तीन मुलाजिमों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के आदेश भी दिए गए हैं। 
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घटना की जानकारी मिलने पर रविवार को एडीजीपी जेल प्रवीण सिन्हा अमृतसर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। घटना के बाद जेल प्रशासन ने सभी बैरकों के बाहर हथियार बंद सीआरपीएफ के जवानों की गश्त बढ़ा दी है। फरार कैदियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कई टीमों का गठन किया है। डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बताया कि भागने वालों ने बैरक की दीवार में से 10 ईंटें निकालकर एक छेद बनाया।

इसकी सीढ़ी बनाकर वे पहले 16 फुट ऊंची भीतरी दीवार कूदे, फिर बाहरी दीवार कूदे, जो 21 फुट के करीब ऊंची थी। इसे कूदने के लिए उन्होंने स्टील बार की हुक का इस्तेमाल किया और सीढ़ी बनाने के लिए रजाई के कवर का प्रयोग किया। अंत में वे टावर नंबर 10 के पास से जेल कांप्लेक्स में से भाग गए, जो सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में नहीं है। डीजीपी ने बताया कि भागने वाले विशाल का भाई गौरव भी उसी बैरक में है, जो नहीं भागा।
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भागने वाले हवालाती में से एक की पहचान विशाल पुत्र सतीश कुमार (22) निवासी अरा कालोनी मजीठा रोड अमृतसर के तौर पर हुई है। इसके खिलाफ थाना छेहरटा में 2 अप्रैल, 2019 को पॉस्को एक्ट की धारा 376 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज है। वह जेल में 5 अप्रैल, 2019 से बंद था।

भागने वाले बाकी दो भाई हैं, जिनकी पहचान गुरप्रीत पुत्र सुखदेव सिंह (34) और जरनैल पुत्र सुखदेव सिंह (25) निवासी चंडीगढ़ रोड खडूर साहिब, तरनतारन के तौर पर हुई। इनके खिलाफ अमृतसर बी डिवीजन थाने में  एफआईआर दर्ज है। दोनों जेल में 8 जुलाई, 2019 से बंद थे।
 

रात डेढ़ बजे फरार हुए कैदी, 3:20 पर मिली जानकारी

शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, इस जेल में मौजूद अन्य कैदियों ने जेल गार्डों को इन हवालातियों के भागने संबंधी सचेत भी किया था, जिनमें फरार हवालतियों में से एक का भाई भी शामिल है। फरार जरनैल सिंह जेल के भीतर से ही नशे का धंधा चला रहा था। उसके पास से पिछले दिनों एक मोबाइल फोन भी बरामद किया गया था। सूत्रों के अनुसार जेल अधिकारियों को तीनों कैदियों के फरार होने की जानकारी रविवार सुबह 3:20 बजे मिली। कैदियों ने गार्डों को बताया कि रात को जब घना कोहरा छाया हुआ था तो एक बैरक को तोड़कर तीन कैदी फरार हो गए। फिर जेल में लगे सीसीटीवी की फुटेज खंगाली गई तो पता चला कि रात लगभग डेढ़ बजे वारदात हुई है।

अमृतसर जेल में तैनात हैं सीआरपीएफ जवान
अमृतसर केंद्रीय जेल पंजाब की पहली जेल है जहां नवंबर 2019 में सीआरपीएफ के जवानों की तैनाती की गई थी। इसी जेल में कई खूंखार अपराधी भी सजा काट रहे हैं। यह जेल उस समय चर्चा में आई थी जब पंजाब पुलिस ने नशे के तस्कर राहुल चौहान, धरमिंदर सिंह बी बकर सिंह को गिरफ्तार कर इस जेल में रखा था। इन अपराधियों से दो चीनी ड्रोन, दो वाकी-टाकी सेट, छह लाख 22 हजार की नकद राशि के साथ एक इंसास राइफल का मैगजीन बरामद किया गया था। इसके बाद जेल में सीआरपीएफ तैनात कर दी गई थी।

जालंधर डिवीजन के कमिश्नर को जांच के आदेश 
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय जेल अमृतसर से तीन कैदियों के भागने के मामले की न्यायिक जांच जालंधर डिवीजन के कमिश्नर को सौंपी है। इसके साथ ही उन्होंने जेल सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को पेंडिंग जांच के साथ तुरंत निलंबित करने के हुक्म दिए हैं। मुख्यमंत्री ने रविवार रात को हुई इस घटना के दो घंटे के भीतर एडीजीपी (जेल) को जेलों की सुरक्षा चौकस करने के आदेश देते हुए कहा कि भागने वाले हवालातियों को पकड़ने के लिए राज्य स्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया जाए।

सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, भागने वाले हवालाती बैरक तोड़ते ही जेल की अंदरूनी और बाहरी दीवार फांदकर फरार हुए। सुरक्षा में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने जेल की सुरक्षा की समीक्षा के साथ-साथ इसे और मजबूत करने के आदेश भी दिए। उन्होंने न केवल इस जेल की बल्कि राज्य की अन्य जेलों की भी सुरक्षा कड़ी करने के आदेश दिए हैं।
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अमृतसर जेल ब्रेक कांड से खुली जेल प्रशासन की पोल

प्रदेश की सबसे सुरक्षित मानी जाती अमृतसर केंद्रीय जेल की बैरक को तोड़ कर तीन कैदियों के आसानी से फरार होने से जेल की भीतरी सुरक्षा की पोल खुल गई है। पीडब्ल्यूडी द्वारा निर्मित इस जेल की बैरक की दीवार इतनी आसानी से टूट गई, इससे स्पष्ट है कि जेल के निर्माण में लगाया गया मैटीरियल घटिया था। एडीजीपी जेल प्रवीण सिन्हा ने जेल की बैरक की दीवार टूटने को लेकर पीडब्ल्यूडी को भी जांच में शामिल करने का आदेश दिया है।

वहीं फरार तीनों कैदियों ने बैरक की दीवार को कैसे तोड़ा, क्या उनके द्वारा दीवार तोड़ने की आवाज वहां ड्यूटी कर रहे जेल प्रशासन के अधिकारियों या अन्य कर्मचारियों को सुनाई नहीं दी, ऐसे कई सवाल इस कांड के बाद उठे हैं। एडीजीपी सिन्हा के अनुसार प्रारंभिक जांच में तीन कैदियों को फरार करने में जेल स्टाफ का कोई हाथ सामने नहीं आया है लेकिन इस मामले की जांच बारीकी से की जा रही है।

जेल स्टाफ की ड्यूटी में लापरवाही सामने आई है। इसलिए सात मुलाजिमों को मुअत्तल किया गया है। दो वार्डनों धीर सिंह व शमशेर सिंह के साथ-साथ होम गॉर्ड के जवान कश्मीर सिंह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। जेल के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी तीन कैदियों को फरार करने में शामिल पाया गया तो उसके विरुद्ध मामला दर्ज किया जाएगा।    

सिन्हा के अनुसार जेल में सामर्थ्य से अधिक कैदी बंद हैं। जेल की सुरक्षा को लेकर तकनीक की कमी भी पाई गई है। जेल के सभी हिस्सों में सीसीटीवी नहीं लगे हैं। बैरक की दीवार आसानी से टूट गई। इस मामले में पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को जांच के घेरे में लाया जाएगा। सिन्हा ने कहा कि इस केंद्रीय जेल का निरीक्षण करने के लिए वह जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा से बातचीत कर चुके हैं।

अमृतसर और मुक्तसर साहिब की नई बनी जेलों के निर्माण कार्यों की भी जांच होगी। उन्होंने कहा कि लोहे के सरिया के साथ बैरक की दीवार तोड़ी जा रही थी उस समय आसपास के बैरकों के कैदियों ने शोर क्यों नहीं मचाया। वहीं फरार कैदी का भाई भी उसी बैरक में बंद था, वह क्यों नहीं भागा, इस बात की भी जांच चल रही है। वहीं फरार कैदियों के परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है।
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