स्कूली बच्चों को धमकाकर वसूली करने के मामले में नया खुलासा हुआ है। कूल डूड गैंग के सदस्यों ने बच्चों को ब्लैकमेल कर चोरी करने की आदत डाल दी। जब बच्चों के घरों से सामान व रुपये गायब होने लगे तो पैरेंट्स भी चेते और पूछताछ की तो बच्चों ने सारा राज उगल दिया।
एक बच्चे ने पैरेंट्स को बताया कि आरोपियों में शामिल एक युवक पहले उनके स्कूल में ही पढ़ता था। यही सुनकर पैरेंट्स ने प्रिंसिपल को शिकायत दी और पुलिस ने तत्काल जांच शुरू करते हुए तीन आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस की जांच में सामने आया कि इन आरोपियों ने अब तक 29 बच्चों को अपना शिकार बनाया है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी युवक रतन लुबाना, राजबीर सिंह, अमिजोत बच्चों को गुमराह कर पॉकेट मनी खर्च कराते थे, फिर ब्लैकमेल कर घर से सामान व रुपये चुराकर लाने का दबाव डालते थे। बच्चे भी डरकर उनकी डिमांड पूरी करते थे।
सेंट जॉन्स स्कूल का छात्र रहा है रतन
प्रिंसिपल को जब पता चला कि एक आरोपी उनके स्कूल का छात्र रहा है तो पहले उन्होंने अपने स्तर पर जांच की। बच्चों ने कहा कि आरोपी रतन लुबाना सेक्टर-26 स्थित सेंट जॉन्स स्कूल में पढ़ता था। प्रिंसिपल ने रतन की पहचान कर आईजी आरपी उपाध्याय को इसकी शिकायत दी और आरपी उपाध्याय ने तुरंत जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान ही रतन के दूसरे साथी अमिजोत और राजबीर सिंह का भी नाम सामने आया।
ऑपरेशन सेल ने किया था गैंग का पर्दाफाश
आरोपियों की प्रोफाइल
रतन लुबाना: 22 साल(उम्र), किशनगढ़(रेजिडेंट), बीए फर्स्ट ईयर, सेक्टर-10 कालेज(एजुकेशन), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(चेयरमैन), स्पोर्ट्स का बेहतरीन खिलाड़ी(एक्टिविटी)
राजबीर सिंह: जनैतपुर, डेराबस्सी(रेजिडेंट), करीब 25 साल(उम्र), ग्रेजुएशन(एजुकेशन), विदेश जाने की तैयारी में जुटा था(एक्टिविटी)
अमिजोत सिंह: सेक्टर-20(रेजिडेंट), करीब 25 साल(उम्र), अंडर ग्रेजुएट(एजुकेशन), बाडी बिल्डिंग का शौक(एक्टिविटी)
150 बच्चों से था आरोपियों का संपर्क
ऑपरेशन सेल ने तीन युवकों के एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया था, जो झूठी शान-ओ-शौकत दिखाकर कान्वेंट स्कूल के बच्चों से पहले दोस्ती करते थे, फिर डरा-धमकाकर रुपये ऐंठते थे। प्रिंसिपल से सूचना पाकर पुलिस ने धर दबोचा। पुलिस ने आरोपियों से रिमांड के दौरान पूछताछ की और मोबाइल ट्रैप किया तो पता चला कि वे करीब 150 बच्चों के संपर्क में थे। शिनाख्त करवाने पर चार स्कूल के 29 बच्चों से पैसे लेने की बात सामने आई।