ब्यूरो की अब तक की जांच में पाया गया है कि साल 2020-21 के लिए लुधियाना जिले की दाना मंडियों में लेबर, कारटेज और ट्रांसपोर्टेशन के काम के लिए टेंडर भरते समय उक्त ठेकेदारों ने जिन वाहनों की सूचियां विभाग को प्रस्तुत कीं, उनके रजिस्ट्रेशन नंबर स्कूटरों, मोटरसाइकिलों व कारों के थे। जांच में साफ हो गया कि ठेकेदारों की इस गड़बड़ी को जिला टेंडर समिति के संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों ने परस्पर आपराधिक मिलीभगत के चलते तस्दीक नहीं की।
अगर इसकी जांच होती तो विभाग की नीति के अनुसार तकनीकी बोली को रद्द करना अनिवार्य होता लेकिन ऐसा नहीं किया गया। दरअसल, अनाज की लोडिंग व अनलोडिंग से संबंधित गेट पासों में ढुलाई के लिए इस्तेमाल जिन स्कूटरों, मोटरसाइकिलों और कारों के रजिस्ट्रेशन नंबर मिल हैं, वह वाहन माल की ढुलाई ही नहीं कर सकते।
वाहनों के गेट पास के आधार पर अदायगी भी हुई
विजिलेंस ने जांच में मान लिया है कि उक्त वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबरों के विवरण के साथ इनके गेट पास में दर्ज ढुलाई की गई वस्तुओं की मात्रा से यह साफ हो गया है कि गेट पास में दर्ज अनाज की फर्जी रिपोर्टिंग और हेराफेरी की गई है। विजिलेंस ने बताया कि इन गेट पास के आधार पर विभाग के अधिकारियों ने बिना तस्दीक तेलू राम ठेकेदार, गुरदास राम एंड कंपनी के मालिक व हिस्सेदार जगरूप सिंह और ठेकेदार संदीप भाटिया को अदायगी भी की है।
विजिलेंस ब्यूरो ने उपरोक्त व्यक्तियों के साथ-साथ विभाग के दोषी अधिकारियों के खिलाफ नकली दस्तावेज पेश करने व स्वीकार करने, माल की नकली ढुलाई के लिए एक-दूसरे के साथ मिलीभगत करने के आरोप में केस दर्ज किया है।
करीबी जिलों की मंडियों में भी जांच करेगी विजिलेंस
विजिलेंस ब्यूरो के अधिकारी ने बताया कि इस मामले में जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा, ताकि अन्य जिलों की मंडियों में लेबर, कारटेज और ट्रांसपोर्टेशन टेंडरों का काम भी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के पास ही रहता है। अधिकारी ने बताया कि लुधियाना से सटे सभी जिलों के अलावा सूबे के छह अन्य जिलों की औचक जांच भी की जाएगी।